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आज भी रपटा पार में बह रहे पानी को पार कर 36 गांव के स्कूली बच्चों के साथ ही ग्रामीण पहुंचते हैं स्कूल

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आज भी रपटा पार में बह रहे पानी को पार कर 36 गांव के स्कूली बच्चों के साथ ही ग्रामीण पहुंचते हैं स्कूल

विजय साहू

गरियाबंद. बेलाट नाला नदी उस पार के ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है. स्थिति यह है कि इस नाले में बने रपटा में बाढ़ के दिनों में पानी 10 से 12 फीट तक चलता है. ऐसे मे नदी उस पार के 36 गांवों का संपर्क देवभोग मुख्यालय से टूट जाता है.अभी हाल ही में अंचल में तीन से चार दिनों तक हुई लगातार बारिश के बाद बेलाट नाला अपने उफान पर था,यहां के रपटे में 10 से 12 फीट तक पानी बह रहा था.

वहीं नदी उस पार के 36 गांवों का संपर्क चार से पांच दिनों तक मुख्यालय से कट गया था. वहीं पूरा 36 गांव टापू में तब्दील हो गया था.यहां सबसे खास बात यह है कि बारिश लगातार होने से तेल नदी और बेलाट नाला का पानी मिल जाता है. ऐसे में आसपास के किसानों के खेतों के फसलों को भी बेलाट नाला का पानी चौपट कर देता है.

वहीं नदी उस पार के 36 गांव के ग्रामीणों के लिए बेलाट नाला आज भी बड़ी समस्या बनी हुई है,इसके बाद भी जिम्मेदार आज तक कार्रवाई करने के लिए ध्यान नहीं दे रहे है,मामले में कांग्रेस ने बीजेपी के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर उदासीन होने का आरोप लगाया है.

पखवाड़े भर तक बच्चे नहीं पहुंच पाते स्कूल
बेलाट नाला में अभी हाल ही में हुई बारिश के बाद उफान की स्थिति निर्मित हो गई थी,वहीं बेलाट नाला स्कूली बच्चों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आती है.यहां नाला के कारण स्कूली बच्चे पन्द्रह दिन तक स्कूल नहीं पहुंच पाते.नदी उस पार रहने वाले स्कूली बच्चों तक पानी के चलते स्कूली वाहन भी नहीं पहुंच पाता,वहीं देवभोग से जोडऩे वाला प्रमुख मार्ग के बीच बेलाट नाला सबसे बड़ा अवरोधक बनकर सामने आ जाता है.

ऐसी स्थिति में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है.नदी उस पार कोदोबेड़ा में रहने वाली जिला पंचायत सदस्य उर्मिला बाई पात्र का कहना है कि बेलाट नाला नदी उस पार के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. श्रीमती पात्र की माने तो वे जिले के उच्चाधिकारियों को भी बेलाट नाला की समस्या से अवगत करवा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारों ने आज तक कोई उचित कदम नहीं उठाया.

श्रीमती पात्र बताती हैं कि जल्द ही बेलाट नाला की समस्या को लेकर 36 गांव के ग्रामीणों के साथ वे बैठक करने जा रही हैं, इसके बाद देवभोग में एसडीएम कार्यालय का घेराव कर अनिश्चिकालीन धरना में बैठकर जिम्मेदारों को जगाने का प्रयास किया जाएगा.

हाल में एक व्यक्ति ने तोड़ा था दम
उफनती बेलाट नाला के पानी के चलते जामगांव का एक अधेड़ व्यक्ति समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाया था,और उसकी मौत हो गई थी.मामला बीते रविवार का है,यहां जामगांव का एक अधेड़ व्यक्ति डींगर नागेश को परिजन दुपहिया में बिठाकर बेलाट नाला के रपटे के उपर चल रहे एक फीट पानी को पार करवाकर देवभोग अस्पताल ला रहे थे,इसी दौरान जैसे ही अधेड़ को परिजनों ने बेलाट नाला पार करवाया,इसके बाद उसने नाला पार करते ही दम तोड़ दिया.मामले में परिजनों ने उस दौरान भी बेलाट नाला की समस्या को लेकर शासन-प्रशासन को जमकर कोसा था.ऐसी ही स्थिति विधार्थियों के साथ बनती है,विधार्थी भी बेलाट नाला के रपटे में पानी होने के कारण अपने पाठ्यक्रम से पीछे हो जाते है.

18 पंचायत के सरपंच और ग्रामीण होंगे लामबंद
मामले में नदी उस पार पडऩे वाले कुम्हड़ईखुर्द, कुम्हड़ईकला,दीवानमुड़ा,झाखरपारा,नवीन कलीभांठा,सेनमुड़ा,दहीगांव,निष्टीगुड़ा,कोसमकानी,उसरीपानी,झिरीपानी,कोदोभाठा,पुरना-पानी,माड़ागांव के साथ ही अन्य पंचायतों के सरपंचों ने बेलाट नाला को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है.सरपंचों की माने तो बरसात के दिनों में उनका संपर्क मुख्यालय से कट जाता है. किसी का स्वास्थ्य यदि ज्यादा खराब हो जाए,तो भी वे समय पर मरीज को डाक्टर के पास नहीं पहुंचा पाते.


ऐसी परिस्थितियों के बीच आजादी के बाद से उन्हें रहना पड़ रहा है.सरपंचों ने एक सुर में कहा कि बार-बार इस समस्या से अवगत करवाया जाता है,लेकिन जिम्मेदार कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे है,ऐसे में सरपंचों ने मन बनाया है कि एक बैठक आयोजित कर मामले में उचित रणनीति बनाकर जिम्मेदारों को बेलाट नाला की समस्या को लेकर जगाने का प्रयास किया जाएगा.वहीं मामले में ग्रामीण भी सरपंचों के साथ सुर में सुर मिलाते हुए नजर आ रहे है.