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पांचवें साल में बिना मान्यता लिए ही मेडिकल कॉलेज में दिया 50 स्टूडेंट्स को एडमिशन

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मेडिकल कॉलेज

रायगढ़। लखीराम मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को चार साल तक मान्यता देने के बाद एमसीआई ने पांचवें साल के लिए मान्यता नहीं दी थी। इसके बाद भी सत्र 2018-19 में 50 स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया गया। इसका खुलासा शनिवार को हुआ। एमसीआई की दो सदस्यीय टीम शनिवार को अंतिम साल के लिए मान्यता देने पहुंची थी। मान्यता मिले बगैर एक साल की पढ़ाई पूरी हो गई। फैकल्टी की कमी और अधूरा निर्माण कार्य कॉलेज के लिए बड़ी समस्या है। इससे एमसीआई मान्यता को लेकर सवाल खड़े कर सकती है।

2018-19 में रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग न तो प्रोफेसर नियुक्त कर पाया और न ही पदोन्नति की गई। स्टाफ की कमी एमसीआई के बार-बार कहने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी। पिछले साल निरीक्षण के दौरान प्रोफेसर न होने पर उन्होंने चेतावनी पत्र लिखकर कहा था कि यदि प्रोफेसर की कमी पूरी नहीं की तो मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने कमियों को दूर करने का प्रयास किया।

प्रबंधन ने एमसीआई को अक्टूबर में कम्प्लाइंस रिपोर्ट पेश कर तीन लाख रुपए की फीस जमा कर दी। रिपोर्ट में कहा गया कि मान्यता के लिए कमियों को जल्दी पूरी कर ली जाएगी। कम्प्लाइंस रिपोर्ट पेश करने के सात माह बाद एमसीआई की दो सदस्यीय टीम में शामिल अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज के डाक्टर यश जोरावर और लुधियाना मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर संजीव पाल सिंह आए थे।

एमसीआई ने निकाली ये कमियां

  • ओपीडी में औसतन रोजाना 600 मरीज आ रहे हैं, जबकि 1000 आने चाहिए।
  • 60 के बजाय केवल 38 सीनियर रेसीडेंट डॉक्टर परीक्षा हॉल और सेंट्रल लाइब्रेरी की साइज मानक के अनुसार नहीं है।
  • ई-क्लास की सुविधा नहीं है
  • एमआरडी (मेडिकल रिकार्ड डिपार्टमेंट) में बीमारियों के अनुसार आंकड़े नहीं है
  • पिछले साल वर्कशॉप नहीं किया गया।

छुट्टी पर गए डॉक्टर वापस बुलाए गए

निरीक्षण करने शनिवार को एमसीआई की टीम अचानक पहुंच गई। इससे पूरे दिन कॉलेज प्रबंधन सकते में रहा। फैकल्टी की कमी से जूझ रहे कॉलेज को हेड काउंटिंग में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए आनन-फानन में छुट्टी पर गए डाक्टरों को बुलाना पड़ा। कॉलेज को फिफ्थ ईयर के सेटअप के अनुसार 150 डॉक्टरों की जरूरत है जबकि अभी 135 पदस्थ हैं।

अधीक्षक को नहीं पता अस्पताल में कहां है माइनर ओटी

एमसीआई की दो सदस्यीय टीम शनिवार को मेडिकल कॉलेज के बाद मेकाहारा पहुंची। यहां दोनों सदस्यों ने नर्सों से भी वार्ड में सुविधाओं की जानकारी ली। इसके बाद टीम अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में पहुंची। टीम के चीफ कोऑर्डिनेटर डॉ यश जोरावर ने अधीक्षक डॉ केएन चौधरी से माइनर ओटी की जगह पूछी। डा. चौधरी बता ही नहीं पाए कि माइनर ओटी कहां है।