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विधानसभा में साढ़े 13 घंटे चर्चा के बाद रात 1.30 बजे गिरा विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव

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विधानसभा में साढ़े 13 घंटे चर्चा के बाद रात 1.30 बजे गिरा विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने राज्य सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव लाया। यह तकरीबन साढ़े 13 घंटे चली चर्चा के बाद रात 1.30 बजे ध्वनिमत से गिर गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने विपक्ष की ओर से दोपहर 12.10 बजे अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। स्पीकर डॉ. चरणदास महंत के चर्चा शुरू करने के निर्देश के बाद भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार पर हमले की शुरुआत की। अंत में सीएम भूपेश बघेल ने सरकार की उपलब्धि गिनाने के साथ-साथ विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को आड़े हाथों लिया। इसके बाद सत्तापक्ष के सदस्यों ने हाथ उठाकर विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को गिर कर दिया।

अविश्वास पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच हुई बहस और हंगामे के कारण कई बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। स्पीकर डॉ. महंत ने तो पक्ष और विपक्ष, दोनों के व्यवहार पर जमकर नाराजगी जताई। दोनों पक्ष पहली बार तब उलझे, जब संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसे शुद्ध रूप से राजनीतिक छुट्‌टी बताया तो कांग्रेस के लगभग सभी आदिवासी विधायक विरोध में खड़े हो गए और कहा कि चंद्राकर आदिवासी समुदाय का अपमान कर रहे हैं। चंद्राकर के बयान का सीएम भूपेश ने भी विरोध किया और कहा कि वे हमेेशा उकसाने वाली बात बोलते हैं। इसके बाद हंगामा बढ़ने लगा तो स्पीकर ने 10 मिनट सदन की कार्रवाई रोक दी।

इसके चर्चा दोबारा शुरू हुई, तब संसदीय कार्यमंत्री चौबे ने कहा- जनता से हमने जो वादे किए थे, उस पर खरे उतरे। अभी कांग्रेस के 71 विधायक हैं। अगली बार 75 प्लस के साथ सरकार बनाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से फटकार मिली तब यहां के नेता ऐसा अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए हैं, जिसका वजन नहीं है। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि भाजपा के लोग ठगी की बात कर रहे हैं। एक बार इनके मंत्री विदेश दौरे पर जा रहे थे, एजेंट एक लाख रुपए लेकर फरार हो गया। इनके समय तो मंत्री तक सुरक्षित नहीं थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में सरकार की उपलब्धियों के उल्लेख के साथ-साथ विपक्ष पर तीखे हमले भी किए। उन्होंने कहा- हमने गांव, गरीब, किसानों और मजदूरों की भलाई के लिए कर्ज लिया। लोगों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाईं। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सुपोषण को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। कोरोना में दो साल गए, उसके बावजूद शिक्षा और रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए। सीएम भूपेश ने कहा – विकास, विश्वास और सुरक्षा हमारा मंत्र है। मैंने बस्तर से सरगुजा तक 27 जिलों का दौरा किया, जिसमें दो ही मांगें आईं। पहला, स्वामी आत्मानंद स्कूल और दूसरा बैंक। बैंक इसलिए क्योंकि लोगों के पास धान खरीदी, वनोपज संग्रहण और अन्य योजनाओं का पैसा आया है। पूरे विश्व में गोधन न्याय योजना पहली है। हमारी सरकार ने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के साथ काम शुरू किया और छत्तीसगढ़ियों का मान बढ़ाया।

विपक्ष ने कहा-सरकार पर विधायकों को विश्वास नहीं

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि इस सरकार ने विधायकों ही नहीं, जनता का भी विश्वास खो दिया है। जिन घोषणाओं के बल पर यह सरकार आई है, मुश्किल से आधी भी पूरी नहीं कर पाई। दुर्भाग्यजनक है कि घोषणापत्र बनाने वाले सदन में नहीं हैं। शराबबंदी के लिए महिलाओं के वोट लिए, लेकिन शराब के कारण प्रदेश की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यदि विधायक किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाएं, या विधायक किसी मंत्री पर हत्या करवाने के आरोप लगाएं, तो सरकार में विश्वास कहां है? जब विधायक ही सरकार पर विश्वास नहीं कर रहे हैं तो जनता कैसे विश्वास करेगी।