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एशिया का दूसरा सबसे बड़ा गिरजाघर है हमारे छत्तीसगढ़ में, ऐसा होता है यहां क्रिसमस सेलीब्रेशन

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एशिया का दूसरा सबसे बड़ा गिरजाघर है हमारे छत्तीसगढ़ में, ऐसा होता है यहां क्रिसमस सेलीब्रेशन

इतिहास देखें तो 1962 में इस चर्च की नींव रखी गयी थी, जिसे पूरा होने में 17 साल लगे

जशपुर। कुनकुरी का महागिरजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा गिरजाघर माना जाता है। जशपुर से महज 50 किलोमीटर दूर बने इस चर्च की वास्तुकला बेहद अद्भुत है। आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि यह विशालकाय चर्च केवल एक पिलर पर पर टिका हुआ है, यही नहीं यहां आपको 7 छत और 7 अद्भुत दरवाजे देखने को मिलेंगे।

इतिहास देखें तो 1962 में इस चर्च की नींव रखी गयी थी। जिसे पूरा होने में 17 साल लगे। इसका उद्घाटन 1982 में किया गया था। इस चर्च को बनाने के लिए बाइबिल में लिखे तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वास्तुकला की गयी। इसे बनाने में सबसे बड़ा योगदान आदिवासी मजदूरों का था। ये महागिरिजाघर बेजोड़ वास्तुकला, सुंदरता, भव्यता, प्रार्थना और अपनी आकृति के लिए पूरे देश में विख्यात है। मान्यता है कि इस चर्च में सच्ची प्रार्थना करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

क्रिसमस के एक महीने पहले से ही यहां कैरोल सिगिंग शुरू हो जाती है

एशिया का दूसरा सबसे बड़ा महागिरजाघर कहलाने वाले इस चर्च में एक साथ 10 हजार श्रद्धालु प्रार्थना कर सकते हैं। क्रिसमस में न केवल देश से ही बल्कि विदेशों से भी लोग यहां पहुंचकर प्रभु यीशु की प्रार्थना करते हैं। क्रिसमस के एक महीने पहले से ही यहां कैरोल सिगिंग शुरू हो जाती है। यहां हर धर्म के लोग अपनी मुरादें पूरी करने की मन्नत लेकर आते हैं

इस महागिरजाघर की खास बात ये भी है कि ईसाई समुदायों के धर्माध्यक्षों के निधन के बाद उनके शव को इस चर्च की नींव में ही दफना दिया जाता है। जिसके लिए चर्च में कब्र की जगह पहले से ही बनाई गई है।

जशपुर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है बावजूद इसके यहां क्रिसमस की धूम देखते ही बन रही है।