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बालोद:कुत्ते के काटने से महिला की मौत, हाईकोर्ट ने 10 लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया,शासन अपने लोक कर्त्तव्य को पालन करने में रहा विफल- हाईकोर्ट

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बालोद:कुत्ते के काटने से महिला की हुई मौत, हाईकोर्ट ने 10 लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया,शासन अपने लोक कर्त्तव्य को पालन करने में रहा विफल- हाईकोर्ट

रवि भूतड़ा

बालोद। जिले के गुंडरदेही में एक पागल कुत्ते के काटने से महिला की मौत हो गई। इस मामले को लेकर महिला के पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने राज्य शासन व स्थानीय निकाय को अपने कर्त्तव्य के पालन में असफल पाया है। कोर्ट ने इस मामले में मृतक के परिवार को तीन माह के अंदर दस लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। बालोद जिले की गुंडरदेही तहसील क्षेत्र के ग्राम खुटेरी निवासी याचिकाकर्ता शोभाराम साहू की पत्नी ओमबाई साहू को 22 अप्रैल 2017 को गांव में घूमने वाले पागल कुत्ते ने काट लिया।

कुत्ते के काटने पर उसे उपचार के लिए गुंडरदेही शासकीय अस्पताल ले जाया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर बेहतर उपचार के लिए स्पर्श हॉस्पिटल भिलाई ले जाया गया। यहां भी सुधार नहीं होने पर पीड़ित को चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज दुर्ग में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर अस्पताल ने 9 जून 2017 को डिस्चार्ज कर दिया।

10 जून 2017 को उसकी मौत हो गई। कुत्ते के काटने से पत्नी की मौत होने पर पति शोभाराम साहू ने अधिवक्ता गोविंद राम मिरी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की। मामले की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अदालत में सुनवाई हुई।

इस दौरान कलेक्टर बालोद की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया गया कि मृतक के उपचार के लिए 1 लाख 50 हजार रुपये अस्पताल प्रबंधन को भुगतान किया गया। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से भी 40 हजार की स्वीकृति दिलाई गई है। शासन की ओर से कुत्ते के काटने से मौत होने पर क्षतिपूर्ति दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है।

याचिकाकर्ता द्वारा एफआईआर व पीएम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मुख्यमंत्री बीमा योजना का लाभ नहीं दिया जा सका है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि राज्य शासन व स्थानीय निकाय का यह लोक कर्तव्य है कि आवारा, पागल कुत्ते को नियंत्रित करना। शासन अपने इस कर्त्तव्य का निर्वहन करने में असफल रहा है। इसके फलस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

हाईकोर्ट द्वारा कुमारी दिव्या वर्मा के मामले में पारित आदेश के अनुसार राज्य शासन को तीन माह के अंदर मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूर्व में मृतक के उपचार के लिए अस्पताल में जमा कराए गए 1 लाख 50 हजार रुपये को क्षतिपूर्ति राशि से कटौती करने के निर्देश दिए है|

याचिकाकर्ता ने सिर्फ उपचार व्यय मांगा था-

याचिकाकर्ता शोभाराम ने रेबीज से पीड़ित पत्नी के उपचार में आई खर्च की राशि दिलाए जाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई में राजस्थान हाईकोर्ट समेत अन्य हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत व निर्देशों को देखते हुए ओम बाई की मौत के लिए शासन को जिम्मेदार मानते हुए उक्त आदेश पारित किया है।

रेबीज से मौत पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान नहीं-

मामले में शासन की ओर से जवाब पेशकर कोर्ट को बताया गया कि प्राकृतिक आपदा, गढ्ढे में गिरने, सांप काटने, बिच्छू काटने, जंगली सरीसृप काटने, नदी, तालाब, बांध, कुआं, नहर, नाला, नाव दुर्घटना, रसोई गैस विस्फोट से मौत होने की सूचना मिलने पर चार लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिये जाने का प्रावधान है। इसमें रेबीज से मौत में मुआवजा का प्रावधान नहीं है।

सरकार धन व कर्मचारी नहीं होने की दलील नहीं दे सकता-

हाईकोर्ट ने मामले मे तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नगरपालिका की यह प्राथमिकता और अनिवार्य कार्य है कि पागलपन, उपद्रव आदि को दूर करना। यह और भी गंभीर बाह है कि कुत्ते व अन्य जानवर के काटने से कोई व्यक्ति रेबीज का शिकार हो गया है। यह शासन की गंभीर लापरवाही है। सरकार इस कार्य के लिए धन या कर्मचारी उपलब्ध न होने का दलील नहीं दे सकती है