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बड़ी खबरः आज से हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू, विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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बड़ी खबरः आज से हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू, विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

अंबिकापुर। जिले से बड़ी खबर मिली है। ग्रामीणों के विरोध के बीच आज से सरगुजा के हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। दरअसल, कोल खनन के लिए जंगल को काटा जा रहा है। वहीं, कोल खनन के लिए हजारों पेड़ों की बलि की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रदेश के मंत्री टीएस सिंहदेव ने तीन दिन पहले ही मुख्यमंत्री का हवाला देते हुए हसदेव में नई खदानों को नहीं खोलने का भरोसा दिया था, लेकिन नई खदानों का विरोध कर रहे हसदेव अरण्य के कई आदिवासी सरपंचों को तड़के पुलिस उनके घरों से उठा ले गई है। आज सुबह 5 बजे एसपी कलेक्टर परसा क्षेत्र में पहुंचे थे।

इससे पहले भी पेड़ों की कटाई के लिए टीम पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद वापस लौट गई थी। उदयपुर क्षेत्र में महिलाएं और पुरुष लाठी डंडा लिए पेड़ों की कटाई और जेसीबी से बनाए जा रहे रास्ते को बंद कराने के लिए पहुंच गए थे। इस बार भी ग्रामीण जंगलों को बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। आदिवासी जल, जंगल, जमीन को भगवान मानकर पूजते हैं।

राज्य सरकार ने दी थी मंजूरी

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले 6 अप्रैल 2022 को सरगुजा जिले में परसा ईस्ट एवं कांते बेसन कोल माईन फेज टू के विस्तार को आधिकारिक मंजूरी दे दी थी। दोनों कोल ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत निगम को आबंटित है। एमडीओ के जरिए अडानी ग्रुप को खनन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछली बार कोल खनन के लिए पेड़ो की कटाई का जबरदस्त विरोध हुआ था।

आज गिरफ़्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं

  • उमेश्वर सिंह अर्मो (सरपंच पतुरियाडांड)
  • जगरनाथ बड़ा (ग्राम पुटा)
  • जयनंदन सिंह ( सरपंच ग्राम घटबर्रा)
  • राम सिंह मरकाम
  • श्रीपल सिंह ( सरपंच बासेन)
  • ठाकुर राम खुसरो ( ग्राम सालहि)
  • शिव प्रसाद की पत्नी (ग्राम बासेन)
  • श्रीपाल सरपंच की पत्नी (ग्राम बासेन)
  • श्याम लाल श्याम और उनकी पत्नी ( ग्राम बासेन)
  • आनंद राम कुसरो ( ग्राम सालहि)

पूरे गांव को विस्थापित करने का है प्रस्ताव

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को परसा ईस्ट केते बासन कोयला खदान 2012 में आवंटित हुई थी। इसमें 2013 से खनन जारी है। 2019 में इसके दूसरे फेज का प्रस्ताव आया था। इसमें परियोजना के लिए 348 हेक्टेयर राजस्व भूमि, 1138 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण सहित करीब 4 हजार की आबादी वाले पूरे घाटबर्रा गांव को विस्थापित करने का प्रस्ताव है। इन इलाकों में इन खदान को बनाने जंगल भी काटे जा रहे हैं। जिसका ग्रामीण विरोध भी कर रहे हैं।