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जन्मदिन विशेष : देश में आर्थिक सुधारों के सूत्रधार माने जाते हैं मनमोहन सिंह

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जन्मदिन विशेष : देश में आर्थिक सुधारों के सूत्रधार माने जाते हैं मनमोहन सिंह

नई दिल्ली :देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का आज जन्मदिन है। देश में आर्थिक सुधारों के सूत्रधार माने जाने वाले मनमोहन को दुनिया विद्वान, विचारक और एक कुशल अर्थशास्त्री के रूप में जानती है। उन्हें पद्म विभूषण के साथ अनेकों पुरस्कार मिल चुके हैं। दस साल तक बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल संभालने वाले मनमोहन सिंह को अपने कार्यकाल के दौरान हुए कई घोटालों की वजह से काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। आज उनके जन्‍मदिन पर हम लाए हैं महत्‍वपूर्ण जानकारियां..

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 में पंजाब प्रांत के गाह बेगल गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान में पड़ता है। देश विभाजन के बाद उनका परिवार अमृतसर आ गया। इनकी मां का देहांत बचपन में ही हो गया था।

मनमोहन सिंह बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज़ थे। वह हमेशा ही अपने क्लास में टॉपर रहे। उन्‍होंने पंजाब विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में बी.ए (आनर्स) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 1954 में यहीं से एम.ए (इकोनॉमिक्स) में भी उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया।

पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के लिए वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेफिल्ड कॉलेज से मनमोहन सिंह ने डी. फिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे।

वे 1971 में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये। इसके तुरन्त बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। बाद में वो योजना आयोग उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक गवर्नर, प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अध्यक्ष भी रहे हैं।

हमारे देश में आर्थिक उदारीकरण और ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत करने वाले मनमोहन की पुस्तक ”इंडियाज़ एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ” भारत की अन्तर्मुखी व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है। मनमोहन राजनीति में वंशवाद के विरोधी रहे हैं और उनका कोई भी करीबी रिश्तेदार राजनीति में नहीं आया।

मनमोहन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। मनमोहन सिंह की बेटी दमन सिंह ने अपनी किताब ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल: मनमोहन एंड गुरुशरण’ में मनमोहन सिंह के जीवन के कई राज से लोगों को रूबरू कराया है और कहीं न कहीं उनकी कमजोर छवि को तोड़ने की कोशिश की है।

दमन की किताब के अनुसार मनमोहन के पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने। लिहाजा उन्‍होंने अमृतसर के खालसा कॉलेज के प्री-मेडिकल कोर्स में दाखिला भी लिया था लेकिन कुछ ही महीनों के बाद पढ़ाई में दिलचस्पी न होने के कारण उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़ दी और अपने पिता की दुकान पर हाथ बंटाने लगे।

1991 में जिस वक्त उन्हें देश का वित्त मंत्री बनाए जाने की जानकारी दी गई उस समय वह सो रहे थे। पीटीआई के मुताबिक मनमोहन सिंह के लिए ही यह फैसला अप्रत्याशित था।

मनमोहन सिंह शुरू से ही कोई घरेलू काम नहीं कर पाते हैं। वे अंडा तक नहीं उबाल पाते थे और न ही टीवी चालू कर सकते हैं।

मनमोहन सिंह की पहचान भले मौनमोहन की बनी हो, लेकिन अपने दोस्तों के बीच उन्हें मज़ाक करने की आदत भी रही है। उन्हें लोगों को निकनेम देने में भी खूब मजा आता रहा है। यहां तक कि अपनी पत्नी गुरशरण कौर का निकनेम उन्होंने गुरुदेव रखा हुआ है।