Home विदेश चीन समर्थक अब्दुल्ला यामीन को हराकर सोलिह बने मालदीव के राष्ट्रपति

चीन समर्थक अब्दुल्ला यामीन को हराकर सोलिह बने मालदीव के राष्ट्रपति

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चीन समर्थक अब्दुल्ला यामीन को हराकर सोहिल बने मालदीव के राष्ट्रपति

माले। मालदीव में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हराकर मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के इब्राहिम मोहम्मद सोलिह अगले राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि सोलिह को 58.3 प्रतिशत वोट मिले हैं। अपनी जीत से अभिभूत सोहिल ने अपने पहले भाषण में कहा कि “यह पल खुशी और उम्मीद का है।“ यामीन ने अपनी हार के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

54 साल के सोलिह को 262,000 हजार वोट में से 133808 वोट मिले, जबकि यामीन को 95,526 वोट मिले। राष्ट्रपति चुनाव में 88 फीसदी मतदान हुआ। इस चुनाव में कोई अन्य उम्मीदवार खड़ा नहीं हुआ था, क्योंकि उनमें से कई उम्मीदवार जेल में थे या फिर कुछ को देश छोड़ना पड़ा था।

जीत की घोषणा के साथ ही सोलिह की एमडीपी का पीला झंडा लेकर समर्थक सड़कों पर उतर आए। नतीजे आने के बाद यामीन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सोलिह ने कहा कि यामीन को जनता की इच्छा का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि जनाधार उनके खिलाफ आया है। उन्हें शांति से सत्ता हस्तांतरण करना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक बंदियों को फौरन रिहा करने की अपील भी की।

यामीन नवंबर 2013 में राष्ट्रपति बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान राजनीतिक पार्टियों, अदालतों और मीडिया पर कार्रवाई की गई। यामीन के खिलाफ महाभियोग की कोशिश कर रहे सांसदों पर कार्रवाई की गई। इनमें से कई देश छोड़कर चले गए या कुछ को जेल में डाल दिया गया।

दरअसल, मालदीव में इसी साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राजनीतिक बंदियों को छोड़ने का आदेश दिया था। राष्ट्रपति यामीन ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार करते हुए वहां 15 दिन की इमरजेंसी लागू कर दी थी।

राजनीतिक संकट में मालदीव के विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से सैन्य दखल की गुहार लगाई थी। भारत ने भी मालदीव के हालात पर चिंता जताई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद पैदा हो गया।

अब्दुल्ला यामीन का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। उनके कार्यकाल के दौरान चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में बड़े स्तर पर निवेश किया। सवा चार लाख की आबादी वाला मालदीव भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हिंद महासागर में होने की वजह से ये देश भारत के लिए बेहद अहम है।

बीते कुछ समय में चीन ने वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत यहां निवेश करना शुरू किया है। 2011 तक चीन का मालदीव में कोई दूतावास भी नहीं था, लेकिन अब चीन वहां मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी में है।


दोनों देशों के बीच हालिया समय में कई व्यापार समझौते भी हुए हैं। माना जा रहा है कि चीन मालदीव के बहाने भारत को घेरना चाहता है। उसने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर भी निवेश किया है।