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विधानसभा में राज्यपाल के अविभाषण पर चर्चा, दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कहा किसानों के साथ हुआ धोखा

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विधानसभा में राज्यपाल के अविभाषण पर चर्चा,

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज पूर्व सीएम अजीत जोगी और पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने राज्यपाल के अविभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन भाषण दिया। अजीत जोगी ने शायराना अंदाज में कहा ‘वो चिराग और होंगे जो तेज हवाओं से बुझते हो, मैने तो जलने का हुनर चरागो से सीखा है। पूर्व सीएम ने राज्यपाल के अविभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन भाषण देते हुए कहा कि जैसा ऐतिहासिक जनादेश इस सरकार को मिला है ऐसा जनादेश शायद ही किसी को मिले। इसलिए ऐसा कुछ कर दिखाए जिससे इतिहासकार यह लिखें कि यह छत्तीसगढ़ का सबसे बेहतर काल था।

अजीत जोगी ने कहा कि कांग्रेस के घोषणापत्र और करनी में विरोधाभाष है। राहुल गान्धी ने कहा था कि सब किसानों का सब कर्ज माफ़ होगा। लेकिन अधिसूचना में मध्यकाल और दीर्घकालिक कर्ज समेत चार तरह के कर्ज माफ़ नही होगे। जोगी ने कहा छत्तीसगढ़ की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण शराब है। छत्तीसगढ़ को शराब में डूबाये रखने की साजिश है। मैने भी शराब पी है और काफी दिन तक शराब पी है लेकिन मुझे बाद में पता चला तो मैने छोड़ दी। एक बार तो यहाँ बैठे एक विभूति के साथ विदेश दौरे में भी पीया। मैं सरकार से निवेदन कर रहा हूँ कि पूर्ण शराबबन्दी का फ़ैसला तत्काल लें।

श्री जोगी ने कहा कि सरकार द्वारा की जा रही कर्जमाफी से किसान कर्ज से मुक्त नही हो पायेगा क्योकि केवल सहकारी और ग्रामीण बैंकों का अल्पकालिक कर्ज माफ़ हो रहा है। इसलिए हर किसान का हर कर्ज माफ़ किया जाना जरुरी है। छत्तीसगढ़ में पंजाब और कर्नाटक की तरह कर्ज माफ़ नही हो।

नक्सल समस्या लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या

वहीं राज्यपाल के अविभाषण पर पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि नक्सल समस्या लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या है। इससे लड़ने की अगर नीति को बदला गया तो इसके नतीजे भुगतते होंगे। इसपर अगर कोई नीति बना रहें है तो विपक्ष को भी विश्वास में लीजिये। नक्सल समस्या पर राजनीति से उपर उठकर सोचने की जरुरत है। सरकार को लगातार बस्तर में जाना चाहिए। कैबिनेट की बैठक होनी चाहिए। मैं भी वहाँ जाऊंगा आप सबको भी लगातार वहा जाना चाहिए।

पूर्ण शराबबन्दी का वायदा किया है तो उसे पूरा करें। यह कहने से काम नही चलेगा कि पुरानी सरकार की स्टडी रिपोर्ट ठीक नही है। हमारे ही काम को आगे बढ़ाना था तो हमारे ही घोषणापत्र से काम चला लेते। सभी विभागों के डेवलपमेंट के पैसे वापस बुलाए जा रहे है। 25 दिन के सरकार में इस तरह की अराजकता की स्थिति बन गई है।