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छत्तीसगढ़ में पांचवीं पास बच्चों को नहीं कटानी पड़ेगी टीसी, पास के मिडिल स्कूल भेज देंगे दस्तावेज

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मिडिल स्कूल

रायपुर। रायपुर के स्कूलों में कक्षा पांचवीं की बेसलाइन टेस्ट दे चुके बच्चों को पास के मिडिल स्कूल में जाने के लिए टीसी (स्थानांतरण प्रमाणपत्र) लेने की जरूरत नहीं होगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने मिडिल स्कूलों में दस्तावेज स्थानांतरित करने के लिए कहा है। हालांकि जो बच्चे पांचवीं के बाद कहीं अन्य जगह पढ़ना चाहेंगे वे टीसी लेंगे, लेकिन परिसर से लगे मिडिल स्कूलों में टीसी खुद-ब-खुद शिक्षा विभाग ही भेज देगा।

इसी तरह आठवीं पास बच्चों को अब अगली कक्षा में नाम लिखवाने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। उन्हें भी टीसी (स्थानांतरण प्रमाणपत्र) लेने की जरूरत नहीं होगी। पास के हाई स्कूल में टीसी भेजने के लिए तैयारी चल रही है। पांचवीं और आठवीं के बाद बच्चों के ड्रापआउट होने का भी खतरा रहता है ऐसे में शिक्षा विभाग इस बार बच्चों को ट्रैक करता रहेगा कि कोई बच्चा स्कूल तो नहीं छोड़ रहा है। रायपुर में पांचवीं-आठवीं में 40 हजार बच्चों को इसका फायदा मिलेगा।

16 जून से शुरू होगी दाखिले की प्रक्रिया

16 जून से सरकारी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार स्कूलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में जिला शिक्षा विभाग पहली बार ऐसा प्रयोग करने जा रहा है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की टीसी विभाग खुद ही निकटतम सरकारी मिडिल व हाईस्कूल में स्थानांतरित कर देगा।

यदि पांचवीं में कोई बच्चों पढ़ रहा है और वह स्कूल प्रायमरी स्तर की है तो निकटतम सरकारी मिडिल स्कूल में पांचवीं के बच्चों की टीसी स्थानांतरित की जाएगी। इसके बाद मिडिल स्कूल के शिक्षक लगातार ट्रेस करेंगे कि बच्चे ने आगे की पढ़ाई जारी रखी है या नहीं । गौरतलब है कि रायपुर में मिडिल 459, प्राइमरी 737, हाई स्कूल 59 और हायर सेकंडरी 131 है।

जांचेंगे समर प्रोजेक्ट भी

सरकारी स्कूल खुलते ही बच्चों के ग्रीष्मकालीन विभिन्न आर्ट जैसे क्रॉफ्ट, ओरीगेमी, कारीगरी कला, माटी, काष्ठ मूर्ति, बांस कला, रंगोली, मेहंदी, छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाना, चित्रकला और खेलकूद जैसी गतिविधियों में कितना बच्चों ने सीखा यह आंका जाएगा।

बता दें कि इस बार बच्चों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों के बच्चों को अपने स्थानीय इतिहास और गांव के इतिहास की जानकारी हो, इसके लिए शिक्षक और समुदाय पर जिम्मेदारी दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर म्यूजियम बनाना, पेड़- पौधों को गोद लेकर उनको पानी देना, चिड़ियों को पानी और भोजन देने की व्यवस्था कराने के निर्देश दिये गये हैं।