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नागरिकता कानूनः पूर्वोत्तर में आंदोलन, जापान के पीएम का दौरा टला, 5 राज्यों ने कहा- कानून लागू नहीं करेंगे

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नागरिकता कानून

नई दिल्ली। असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में में नागरिकता कानून के विरोध में 5 दिन से उग्र प्रदर्शन जारी है। विरोध बंगाल में भी शुरू हो गया है। यहां हजारों मुस्लिमों ने कानून के विरोध में शुक्रवार को रैली निकाली। असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में जारी उग्र विरोध का असर बड़े आयोजन पर भी पड़ रहा है।

जापान के पीएम शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15-16 दिसंबर को गुवाहाटी में होने वाली मुलाकात टाल दी गई है। गृह मंत्री अमित शाह का शिलॉन्ग दौरा भी रद्द कर दिया गया है। उन्हें रविवार को यहां एक कार्यक्रम में शामिल होना था। इससे पहले गुरुवार देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दी, इसके बाद यह कानून बन गया।

नागरिकता कानून के विरोध में असम समेत पूर्वोत्तर के त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय और मणिपुर में छात्र संगठनों और वाम दलों ने विरोध शुरू किया था। इस दौरान आगजनी, तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुईं। गुवाहाटी में पुलिस फायरिंग में 3 लोगों की जान चली गई। डिब्रूगढ़ में भाजपा विधायक के घर और रेलवे स्टेशन में आग लगा दी गई थी।

केंद्र ने कहा- राज्यों के पास कानून से इनकार करने का अधिकार नहीं
प. बंगाल, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने कहा कि वे अपने राज्यों में नागरिकता कानून लागू नहीं करेंगे। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि राज्यों केंद्रीय कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते। उनके पास यह अधिकार नहीं है।

इससे पहले बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि आप राज्यसभा और लोकसभा में जबरदस्ती बिल पास कर सकते हैं, लेकिन हम आपको देश को बांटने नहीं देंगे। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि राष्ट्र विरोधी कानून की हमारे राज्य में कोई जगह नहीं है।

भारत-जापान ने आपसी बातचीत कर दौरा टाला- रवीश कुमार

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा- मोदी-आबे के बीच द्विपक्षीय वार्ता होनी थी। लेकिन, दोनों देशों ने बातचीत के बाद इसे टाल दिया है। दोनों नेताओं का मणिपुर के बिष्णुपुर में भी एक कार्यक्रम था।

दिल्ली-बंगाल में भी नागरिकता बिल का विरोध

नागरिकता कानून का विरोध दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी और पं. बंगाल में भी शुरू हो गया। जामिया में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के सदस्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलन को रोकने के लिए पुिलस ने लाठीचार्ज किया। उधर, प. बंगाल में भी हजारों मुस्लिमों ने केंद्र और नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया।