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मोदी सरकार के इस कदम ने कुंद कर दी कांग्रेस के ‘ब्रह्मास्त्र’ प्रियंका की धार!

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मोदी सरकार के इस कदम ने कुंद कर दी कांग्रेस के ‘ब्रह्मास्त्र’ प्रियंका की धार!

अनिल शुक्ला

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में ‘धूल’ खा रही पार्टी में नई जान फूंकने के लिए अपनी बहन प्रियंका गांधी की सियासत में एंट्री करा दी. कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की कमान सौंपी, तो वहीं पश्चिम यूपी की बागडोर मध्य प्रदेश के बड़े सियासी चेहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ में दी. प्रियंका गांधी की एंट्री को कांग्रेस के ‘ब्रह्मास्त्र’ की संज्ञा दी जा रही है.

इसके बाद प्रियंका गांधी के रोड शो और ताबड़तोड़ मीटिंग्स और कार्यक्रमों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. कांग्रेसियों की तरफ से दावे भी किए जाने लगे कि प्रियंका के आने से यूपी में विरोधियों खासकर बीजेपी को कड़ी टक्कर मिलेगी, लेकिन पुलवामा हमले के बाद हुई PoK में हुई एयर स्ट्राइक के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत तेजी से करवट लेती दिख रही है.

26 फरवरी को एयरस्ट्राइक के बाद से अब तक प्रियंका गांधी के कई कार्यक्रम रद्द या स्थगित हो चुके हैं. यही नहीं, कांग्रेस ने पुलवामा हमले के बाद शहीदों के घर श्रद्धांजलि देने का एक विस्तृत कार्यक्रम भी बनाया था, राहुल के साथ प्रियंका पश्चिम उत्तर प्रदेश में कुछ शहीद परिवारों के घर हो भी आए थे, लेकिन एयर स्ट्राइक के बाद पूरा प्रोग्राम कहीं गुम सा हो गया है.

पिछले हफ्ते भर की यूपी की सियासत पर नजर डालें तो यहां फिलहाल बीजेपी, पीएम नरेंद्र मोदी, एयरस्ट्राइक और अभिनंदन के ही चर्चे हैं. दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस की तरफ से कई बार खबरें आईं कि प्रियंका गांधी कुंभ में भी गंगा स्नान करने जाने वाली हैं लेकिन अब कुंभ समाप्त हो रहा है और प्रियंका नहीं गईं.

इसी तरह उनके वाराणसी जाने की भी खबरें थीं, लेकिन वह भी अब तक नहीं हुआ है. हालांकि कांग्रेस दिल्ली से यूपी के लिए काम जरूर कर रही है. इसी क्रम में पिछले दिनों बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले को पार्टी ने अपने पाले में कर लिया. यही नहीं दूसरी पार्टियों से भी नेताओं का कांग्रेस ज्वाइन करने का सिलसिला जारी है.

दरअसल लोकसभा चुनाव में जाने से पहले तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में मिली जीत ने कांग्रेस के लिए बूस्टअप का काम किया था. प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी तो ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी यूपी का प्रभारी बना दिया गया. लखनऊ में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के रोड शो ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी. रोड शो के बाद 72 घंटे के अंदर दोनों नेताओं ने नई रणनीति पर काम करना शुरू किया. दोनों नेताओं ने 2000 से ज्यादा प्रभावशाली नेताओं से मुलाकात की.

इस दौरान कहा जाने लगा कि प्रियंका गांधी की वजह से सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस की एंट्री हो जाएगी. सपा-बसपा पहले ही गठबंधन में सीटों का बंटवारा कर चुकी थीं लेकिन इसके बाद भी कयास लग रहे थे कि यूपी में लोकसभा की 80 सीटें है, गठबंधन के बाद फिर से तीनों पार्टियों में सीटों को बांट लिया जाएगा. इसके लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी के साथ मिलकर सीटों के बंटवारे पर काम कर सकते हैं.

इस बीच सपा बसपा ने ऐलान कर दिया कि कौन सी सीट किस पार्टी के हिस्से जाएगी. उन्होंने कांग्रेस के लिए बस ससम्मान अमेठी और रायबरेली सीटें ही देकर तय कर दिया कि कांग्रेस अब इस गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी. उधर प्रियंका गांधी ने अपना पूरा ध्यान छोटी क्षेत्रिय पार्टियों के साथ गठबंधन करने पर लगा दिया है, जो एक, दो या 4 सीटों पर खास जाति या समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं.

पुलवामा हमले के बाद भी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इस रणनीति पर तेजी से काम कर रही थीं लेकिन 26 फरवरी को एयर स्ट्राइक हो गई. इसके साथ ही पूरी राजनीति देश पर केंद्रित हो गई. लोगों और मीडिया का पूरा ध्यान यूपी में कांग्रेस की राजनीति से हटकर देश, पुलवामा अटैक, एयरस्ट्राइक और पाकिस्तान पर चला गया और प्रियंका गांधी कहीं भी चर्चा में नहीं दिख रही हैं.