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60 साल तक भाजपा व कांग्रेस ने नहीं लगाया महिलाओं पर दांव,अब कांग्रेस ने दिया मौका

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60 साल तक भाजपा व कांग्रेस ने नहीं लगाया महिलाओं पर दांव,अब कांग्रेस ने दिया मौका

रवि भूतड़ा

बालोद। जिले का संजारी बालोद विधानसभा, जहां आजादी के बाद वर्ष 1951 में मनोनयन से पहली महिला विधायक डारन बाई बनी। यानि यहां की सियासत पहली बार महिला ने संभाली। इसके बाद से 60 साल यानि 2011 तक भाजपा और कांग्रेस ने एक भी बार महिला को प्रत्याशी बनाकर मैदान पर नहीं उतारा। वर्ष 2011 में विधायक मदन साहू के निधन होने के बाद उपचुनाव हुआ जिसमें उनकी पत्नी कुमारी बाई साहू को भाजपा ने मैदान में उतारा।

इसके बाद से किसी महिला पर इस विधानसभा के लिए दांव नहीं लगाया। वहीं इस बार कांग्रेस ने पहली बार महिला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। वैसे उपचुनाव को छोड़ विधानसभा चुनाव पर गौर करें तो भाजपा ने यहां एक भी महिला को मैदान में नहीं उतारा, वहीं कांग्रेस ने आजादी के बाद पहली बार। वैसे मनोनयन से चुनी गई पहली महिला विधायक कांग्रेस समर्थित थी, लेकिन उस समय आमचुनाव नहीं होता था।

1950 में भारतीय संविधान लागू होने के बाद देश का पहला लोकसभा चुनाव 1951 में हुआ। इस समय केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों में मनोनीत सरकार काम करती थी। 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ।

1951 से अब तक के इतिहास में सिर्फ दो महिला विधायक-

1951 में मनोनयन और 2011 में उपचुनाव में संजारी बालोद विधानसभा सीट में महिला विधायक बनी। यानि अधिकांश चुनाव में यहां पार्टियों ने महिलाओं पर दांव नहीं लगाया।

हीरा लाल और जालम सिंह तीन-तीन बार विधायक- संजारी बालोद विधानसभा सीट की सियासत तीन-तीन बार हीरालाल सोनबोईर और जालम सिंह पटेल ने संभाला। वहीं केशवलाल गुमास्ता दो बार विधायक रहे।

जानिए, संजारी बालोद सीट पर कब कौन रहे विधायक-

वर्ष- विधायक-

1951-52,56 मनोनीत डारन बाई
1956-57 केशोलाल गुमास्ता
1957-62 केशोलाल गुमास्ता
1962-67 केशाेलाल गुमास्ता
1967-72 हीरालाल सोनबोईर
1972-77 हीरालाल सोनबोईर
1977-80 मिश्री लाल खत्री
1980-85 हीरालाल सोनबोईर
1985-90 जालम सिंह पटेल
1990-92 जालम सिंह पटेल
1993-98 जालम सिंह पटेल
1998-03 लोकेन्द्र यादव
2003-08 प्रीतम साहू
2008-11 मदन साहू
2011-13 कुमारी साहू
2013-18 भैय्याराम सिन्हा