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पति की लंबी उम्र के लिए तीजहारिनों का 36 घंटे तक निर्जला व्रत

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रायपुर। देशभर में तीजा का पर्व मनाया जा रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस पर्व अलग ही महत्व है। यहां ‘तीजा’ मनाने के लिए अधिकांश महिलाएं अपने मायके पहुंच गईं हैं। परंपरा के अनुसार तीजहारिनों ने बुधवार शाम कड़ू भात खाया। इसी के साथ पति की दीर्घायु के लिए सबसे कठिन तपस्या शुरू हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि तीजहारिनें अब शुक्रवार सुबह यानी लगभग 36 घंटे तक अन्न तो दूर, जल भी ग्रहण नहीं करेंगी।

अखंड सुहाग की कामना करने का पर्व तीजा गुरुवार को मनाया जाएगा। तीजहारिनें पूरे दिन आराधना में बिताएंगी, वहीं रात में घरो-घर फुलेरा सजाकर मिट्टी के शिवलिंग और माता पार्वती की स्थापना की जाएगी। इसी के साथ शुरू होगी हरितालिका व्रत कथा जो रातभर चलेगी। इस दौरान महिलाएं लगातार भगवान को फुलेरा में झुलाएंगी। अगले दिन यानी शुक्रवार सुबह नदी-तालाब में फुलेरा का विसर्जन करने के बाद महिलाएं अपना व्रत तोड़ेंगी।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जुड़ा है ये पर्व

हरितालिका तीज वैसे तो पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका खासा महत्व है। यह व्रत पर्व छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जुड़ा है। महिलाएं यह पर्व मायके में ही मनाती हैं और उन्हें लाने के लिए लेवाल भेजने की परंपरा है। लेवाल परिवार का मुखिया, भाई , चाचा या नजदीकी रिश्तेदार हो सकते हैं तो तीजहारिन को ससम्मान ससुर से मायके लेकर आते हैं। नव विवाहिताओं से लेकर बूढी उम्र की महिलाएं भी बड़े उत्साह के साथ लेवाल का इंतजार करती हैं। इस अवसर पर घर-घर फुलेरा सजाया जाएगा।