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जो कभी विपक्ष की भूमिका में अवैध कार्यों पर सत्ता पक्ष को घेर करते थे सवाल, आज वही सत्ता में आने के बाद उन्ही अवैध कामों को दे रहे अंजाम…जिले में रेत का अवैध खनन जोरो पर…सीएम के आदेश को ठेंगा दिखा रहे उन्ही के नेता व जनप्रतिनिधि

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रवि भूतड़ा, बालोद। प्रदेश में जो कभी विपक्ष में रहकर पूर्व की भाजपा सरकार के कुछ नेताओं व जनप्रतिनिधियों द्वारा रेत खदान चलाने पर आपत्ति जता कार्यवाही की मांग किया करते थे। आज वही सत्ता पक्ष में आते ही उसी कार्य को अंजाम दे रहे हैं और सबसे दिलचस्प बात यह कि जो कभी प्रदेश की सत्ता में काबिज थी और विपक्ष उनपर उंगलियां उठाता था, आज वही विपक्ष की भूमिका में होते हुए मूकदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण इन दिनों बालोद जिले में देखने मिला रहा हैं।

सत्ताधारी पार्टी के नेताओं व कुछ जनप्रतिनिधि द्वारा जिले में अवैध तरीके से रेत का बेजा दोहन किया जा रहा हैं। सूबे में कांग्रेस की सत्ता आते ही जो कांग्रेसी नेता व जनप्रतिनिधि कभी बिल बना अंदर रहा करते थे। वे भी बिल से बाहर आकर उत्पात मचा रहे हैं। जो कांग्रेस पार्टी कभी विपक्ष की भूमिका में रहते हुए भाजपा पार्टी के नेताओं व जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले में रेत खदान को संचालित किए जाने के चलते आपत्ति जताते हुए कार्यवाही की मांग किया करती थी।

सत्ता में आने के बाद रेत का लगातार अवैध खनन

वही कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता व जनप्रतिनिधि अब सत्ता में आने के बाद रेत का लगातार अवैध खनन किए जा रहे हैं। याने की सत्ता में आने के बाद अब कांग्रेस के सुर ही नही तरीका भी बदल गया हैं। जहां एक ओर सूबे के मुखिया सीएम भूपेश बघेल ने अवैध रेत खनन को रोकने सीएमडीसी द्वारा रेत खदान चलाए जाने की बात कही तो वही दूसरी ओर पार्टी के ही नेता व कुछ जनप्रतिनिधि सीएम भूपेश बघेल के आदेश की अवहेलना कर रेत का अवैध खनन किए जा रहे हैं।

चैन माउंटेन के जरिए रेत निकाल अन्य जिलों में रेत भेजी जा रही हैं। जिसपर जिला प्रशासन भी लगाम नही लगा पा रहा हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार प्रशासन भी सत्ता पक्ष के नेताओं व जनप्रतिनिधियों के बताए रास्तों पर चल रहा हैं। हालांकि जिले का खनिज विभाग तो शुरुआती दौर से ही खनिज माफ़ियाओं को शय देने का ही कार्य करते आया हैं। खनिज विभाग के सानिध्य में ही बालोद जिला खनिज माफियाओं के गढ़ बन चुका हैं। चाहे वह रेत खनन का मामला हो या मुरुम के अवैध खनन का।

खनिज विभाग के अधिकारियों का फिक्स महीना

जिले में अगर किसी विभाग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ है, या उन विभाग के संबंधित अधिकारी अगर भ्रष्ट है तो वह जिले का खनिज विभाग और उनके अधिकारी हैं। खनिज माफियाओं से आपसी मिलीभगत से अवैध कार्यों को भी वैध बता काम कर रहे हैं। जिनसे संबंधित अधिकारियों की दुकानदारी बेधड़क तरीके से चल रही हैं। जिले में खनिज माफियाओं से इन अधिकारियों को बकायदा महीना आता हैं।

कुछ बड़े ठेकेदार तो होली दीवाली में बड़ी-बड़ी मिठाईयों के डिब्बे अधिकारी की टेबल तक पहुचाते हैं। अब उन डिब्बो में मिठाईयां होती है या…..? खैर यहां यह कहना गलत नही होगा कि खनिज विभाग के आलाधिकारी से लेकर विभाग में पदस्थ अन्य अधिकारियों की संपत्तियों की जांच की जाए तो भ्रष्टाचार की परत से पर्दा उठेगा।

एसडीएम मंडावी ने की 3 ट्रैक्टर पर कार्यवाही

जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत हीरापुर में रेत परिवहन करने वाले ट्रैक्टर चालकों से अवैध वसूली की शिकायत पर एसडीएम हरेश मंडावी, तहसीलदार रश्मि वर्मा के साथ राजस्व अमले की टीम ने हीरापुर रेत खदान पर छापा मारा। अफसरों को देख कुछ ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर लेकर भाग निकले लेकिन कुछ ट्रैक्टरों को एसडीएम की सक्रियता से रोक लिया गया। ट्रैक्टर चालकों ने पूछताछ में बताया कि रसीद तो 150 रुपये की मिलती है लेकिन यहां वसूली पांच से सात सौ रुपये की जा रही है।

चालकों ने बताया कि अधिक वसूली की पूछताछ करने पर बताया जाता है कि यह पैसा ऊपर अधिकारियों को भी जाता है। उक्त कार्यवाही से खनिज माफियाओं को लगातार संरक्षण देने वाले खनिज विभाग के मुंह पर एक बार फिर करारा तमाचा पड़ा है। लगातार जिला प्रशासन को गुमराह कर अवैध उत्खनन न होने का दावा करने वाले खनिज विभाग के सारे दावे उस वक्त खुलकर सामने आ गए जब राजस्व विभाग की टीम को कार्यवाही के दौरान रायल्टी की निर्धारित राशि से अधिक से वसूली की ट्रैक्टर चालकों ने बयान दर्ज कराया।