जान जोखिम मे डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं मासूम बच्चे, लंबे समय से की जा रही हैं जाेंक नदी पर पुल बनाने की मांग

@ भानुप्रताप धृतलहरे
टुंड्रा।
ग्राम भवरीद और उपरानी के चालीस छात्र छात्राओं ने नदी में बाढ़ आने से नाव में बैठकर ग्राम मानाकाेनी पढ़ने जाते हैं। जाेंक नदी में बाढ़ आने से अधिकांश छात्र छात्राओं का अनुपस्थित होना पड़ता है। हर वर्ष जाेंक नदी बाढ़ आने से गांवों से संपर्क कट जाता हैं। बरसात में जलस्तर बढ़ने से जान जाेखिम में डालकर नाव बैठकर ग्राम मानाकाेनी पढ़ने जाते हैं। ऐसे में कभी भी अनहोनी घटना घट सकती हैं। नदी में हर वर्ष पुल बनाने की मांग की जाती है पर शासन प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं।ग्राम सर्वे के आधार पर मानाकाेनी में स्टाप डेम बनना था। लेकिन महराजी से साेनाखान पहुंच मार्ग में स्टापडेम बनाया गया हैं। पिछले एक सप्ताह से बारिश हाेने से जाेंक नदी में बाढ़ आने से आवागमन अवरूद्ध हाे गया हैं। बच्चाे की पढ़ाई में गैरहाजिर हाेना पड़ रहा हैं। पूर्व में अखबार में समाचार प्रकाशित हाेने के बाद अधिकारी कर्मचारियाें ने सिर्फ दाैरा करते हैं और इन मासूम बच्चे की समस्या को संज्ञान में नही लेते हैं , यही वजह हैं कि आज भी जान जोखिम में डालकर स्कूली बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं। ग्राम भंवरीद में शासकीय प्राथमिक शाला पहली से पांचवी तक शाला लगती हैं। भंवरीद से कम से कम से पचास छात्र छात्राओं ने नदी में बाढ़ आने से नाव में बैठकर ग्राम मानाकाेनी पढ़ने जाते हैं। यदि कभी भी अनहोनी घटना घट जाती हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मानाकाेनी और भंवरीद के बीच जाेंक नदी में बहुत गहरी हैं। नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा हैं और इस नदी से स्कूली बच्चे भगवान भराेसे नदी पारकर आनला जाना
करते हैं। ब्लाक शिक्षाधिकारी केएन वर्मा से माेबाईल से संपर्क करने पर बताया कि भंवरीद के बच्चे सुविधा के हिसाब से पढ़ाई करने जा रहा हैं। उन बच्चाें के लिए नजदीक के स्कूल में पढ़ाई करने जाना चाहिए। और पुल पुलिया बनाने का काम शासन प्रशासन की जिम्मेदारी हैं। मिडिल स्कूल के प्राचार्य शंकर लाल श्रीवास व हाई स्कूल के प्राचार्य देवलाल टण्डन का कहना हैं कि यहां बच्चाें का आवागमन करने के लिए पुल पुलिया बनना चाहिए ताकि आवागमन सुगम हो सके और स्कूली बच्चों को परेशानी ना हो।