Home राज्य छत्तीसगढ़ इस गुफा में अप्सराएं करती थीं नृत्य, जानिए क्यों होती है यहां...

इस गुफा में अप्सराएं करती थीं नृत्य, जानिए क्यों होती है यहां बादलों की पूजा

229
इस गुफा में अप्सराएं करती थीं नृत्य, जानिए क्यों होती है यहां बादलों की पूजा

दिलीप जायसवाल
अंबिकापुर।
सरगुजा में रामगढ़ की पहाडिय़ों पर स्थित सीता बेंगरा गुफा देश की सबसे प्राचीन नाट्यशाला है। रामगढ़ से जुड़ी किवदंति है कि यहां वनवास काल में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के साथ पहुंचे थे। सरगुजा बोली में भेंगरा का अर्थ कमरा होता है, मतलब यह सीता का कमरा था। प्रवेश द्वार के समीप एक ओर भगवान राम के चरण चिह्न अंकित हैं।

मेघदूतम में रामगिरी पर सिद्धांगनाओं, अप्सराओं की उपस्थिति का भी उल्लेख मिलता है। पुरातत्वेत्ताओं के अनुसार यहां मिले शिलालेखों से पता चलता है कि सीताबेंगरा नामक गुफा ईसा पूर्व दूसरी-तीसरी सदी की है। देश में इतनी पुरानी और दूसरी नाट्यशाला कहीं नहीं है। यहां उस समय क्षेत्रीय राजाओं द्वारा भजन-कीर्तन और नाटक करवाए जाते रहे होंगे।

कालिदास की विख्यात रचना मेघदूतम ने इसी गुफा में आकार लिया था। इस जगह हर साल आषाढ़ के महीने में बादलों की पूजा की जाती है। देश में संभवतः यह अकेला स्थान है। जहां हर साल बादलों की पूजा करने का रिवाज है। इस पूजा के दौरान हर साल आसमान में काले-काले मेघ उमड़ आते हैं। मेघदूतम में उल्लेख है कि यहां अप्सराएं नृत्य किया करती थीं।

अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर स्थित रामगढ़ के जंगल में तीन कमरों वाली देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला है। सीता बेंगरा गुफा पत्थरों को गैलरीनुमा काट कर बनाई गई है। यह 44.5 फीट लम्बी एवं 15 फीट चोड़ी है। दीवारें सीधी तथा प्रवेश द्वार गोलाकार है। इस द्वार की ऊंचाई 6 फीट है, जो भीतर जाकर 4 फीट ही रह जाती हैं। नाट्यशाला को प्रतिध्वनि रहित करने के लिए दीवारों में छेद किया गया है। गुफा तक जाने के लिए पहाडिय़ों को काटकर सीढिय़ां बनाई गई हैं।