Home राज्य उत्तरप्रदेश लोकसभा चुनाव: 29 अप्रैल को वाराणसी से नामांकन दाखिल करेंगी प्रियंका गांधी!

लोकसभा चुनाव: 29 अप्रैल को वाराणसी से नामांकन दाखिल करेंगी प्रियंका गांधी!

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लोकसभा चुनाव: 29 अप्रैल को वाराणसी से नामांकन

वाराणसी. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी 29 अप्रैल को वाराणसी से नामांकन कर सकती हैं. जानकारी के मुताबिक, 29 अप्रैल को प्रियंका गांधी वाराणसी पहुंचेंगी और काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना करेंगी. 29 अप्रैल को वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है.

इसलिए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि 29 अप्रैल को काल भैरव की पूजा के बाद वह नामाकंन दाखिल कर सकती है. हालांकि जब न्यूज18 ने वाराणसी जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री देवेंद्र सिंह से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है.

बता दें, कुछ दिन पहले ही वाराणसी से चुनाव लड़ने पर पूछे गए सवाल पर प्रियंका गांधी ने केरल के वायनाड में कहा था कि पार्टी अगर करेगी तो वाराणसी क्या कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी. मालूम को कि 19 मई को वाराणसी में वोट डाले जाएंगे.

प्रियंका गांधी के वाराणसी से चुनाव लड़ने पर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि प्रियंका को लेकर जो फैसला लेना चाहिए था, पार्टी ने ले लिया है. फैसला क्या हुआ है, इस पर अभी हम सस्पेंस बनाकर रखना चाहते हैं.

चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा मुकाबला

इसमें कोई शक नहीं कि अगर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ती हैं तो यह भारत के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा मुकाबला होगा. एक तरफ देश के प्रधानमंत्री होंगे तो दूसरी तरफ गांधी परिवार का कोई सदस्य.

बता दें, इससे पहले अमेठी के कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने 19 अप्रैल को प्रियंका को लेकर अहम बयान दिया था. दीपक सिंह ने कहा था कि प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी अब वाराणसी में डेरा डालेंगी. वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट है और वो यहां से 26 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने जा रही हैं.

क्या है बनारस का जातीय समीकरण?


बात करें बनारस के जातीय समीकरण की तो यहां पर सबसे ज्यादा बनिया मतादाता हैं, जिनकी संख्या करीब 3.25 लाख हैं. इसके बाद करीब तीन लाख मुस्लिम, ढ़ाई लाख ब्राह्मण, दो लाख पटेल, डेढ़ लाख यादव, सवा लाख भूमिहार, एक लाख राजपूत, 80 हजार चौरसिया, 80 हजार दलित और करीब 70 हजार अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता हैं.