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विभाग को “तौल” कर “नाप” रहे कारोबारी, नाप-तौल के उपकरणों का नहीं हो रहा सत्यापन, विभाग के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालियां निशान… लाईसेंसी सत्यापन के नाम पर कर रहे अवैध वसूली

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रवि भूतड़ा/बालोद- “जागो ग्राहक जागो” के विज्ञापन टीवी-रेडियो पर देखने-सुनने में भले ही तत्काल अधिकार बोध जगाते हों मगर जिले में लगभग प्रत्येक कारोबार के नाम पर एमआरपी पर लूट व घटतौली का खेल बेधड़क जारी है। क्योंकि कारोबार के खिलाड़ी जानते हैं, नाप-तौल विभाग पूरी तरह निष्क्रिय है। यानी उन्होंने विभाग को पूरी तरह से तौल (परख) लिया है। अब वे विभाग व जनता दोनों को ‘नाप’ रहे हैं।

उपभोक्ताओं को राहत दिलाने वाले सरकारी निर्देश बालोद जिले में कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कभी खुदरा नहीं रहने के नाम पर दुकानदार ग्राहकों को चॉकलेट थमा देते हैं तो कभी वेंडर उपभोक्ता को 14.200 किलोग्राम की सिलेंडर देने के बजाय 13.500 किलोग्राम वजन वाले सिलेंडर देकर भाग जाते हैं। ऐसी छोटी-छोटी बातों पर हम भले ही ध्यान न देते हों मगर, चालाक दुकानदार रोज हमें इसी तरह से चूना लगा रहे हैं।

नाप-तौल विभाग के अधिकारी नगर, ब्लॉक मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों के दुकानदारों के यहां उपयोग किए जा रहे तराजू, बांट, कांटे, मीटर, लीटर, मीटर आदि का सत्यापन कार्य करने में रुचि नहीं ले रहे। इस हाल में दुकानों पर रोजमर्रा का सामान खरीदने वाले ग्राहक अमानक तौल व माप होने से ठगे जा रहे हैं। अधिकारियों की उदासीनता के चलते कुछ जगह पत्थर के बांटों का इस्तेमाल हो रहा है, तो कहीं बिना सील लगे तराजू, बांट, कांटे, लीटर व मीटर का इस्तेमाल होते भी देखा जा सकता है।

बावजूद इसके नाप-तौल विभाग द्वारा इस ओर कार्यवाही नहीं की जा रही। दुकानदारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे तराजू, बांट, कांटे, लीटर व मीटर का सत्यापन करने एवं सील लगाने के लिए नाप-तौल विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाए जाने का प्रावधान है। लेकिन जिले में विभागीय स्तर पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही हैं,

यहां हो रहा है अमानक तराजू बांट का उपयोग-

नगर में स्थित सब्जी मंडी के कुछ दुकानदार वर्तमान में पत्थर के बांटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा चक्की वाले भी इसी तरह के बांटों का उपयोग करते देखे जा सकते हैं। दूध डेयरियों पर इस्तेमाल हो रहे लीटरों में भी नाप-तौल विभाग की सील नहीं दिख रही है। इसी तरह कपड़ा मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले मीटरों पर नाप-तौल विभाग द्वारा किया जाने वाला सत्यापन नजर नहीं आता।

सिलेंडर की जांच भी नहीं होती-
नाप-तौल विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को पूरे वजन वाले एलपीजी सिलेंडर देने के लिए एजेंसियों को गाड़ियों से डिलीवरी के समय ही जांच करने का निर्देश कागज में है। मगर इस पर कभी अमल नहीं होता। न तो नाप-तौल विभाग कभी औचक निरीक्षण करता है, न ही उपभोक्ता तौल जांचने की जहमत उठाते हैं। वेंडर जो घर पर सिलेंडर देते हैं उसमें 14.200 किलोग्राम के बदले कभी 14 किलो तो कभी 13.500 किलोग्राम वाले सिलेंडर ही निकलते हैं।

सालों से तौल कांटों का नहीं हो रहा निबंधन

शहर में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े दुकानदारों के पास छोटे-बड़े इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल होंगे। हैरत की बात यह है अगर नाप-तौल कार्यालय में निबंधित तौल कांटे की संख्या की पड़ताल की जाए तो इसका आंकड़ा सौ को भी पार नहीं कर पाएगी। एक तरफ अधिकारी काटे का हर साल भौतिक सत्यापन करने में लापरवाही बरत रहे हैं, तो दूसरी ओर दुकानदार भी बिना लाइसेंस अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। सब्जी, फल विक्रेता, मछली मांस बेचने वालों में से तो किसी के नाप-तौल उपकरणों का भौतिक सत्यापन होता ही नहीं है।

मात्रा में भी नियमों का मखौल-
विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2011 में दर्जन में केले बेचना, पौंड में केक, गैलन में पानी बेचना प्रतिबंधित है। दर्जन, पौंड, ओंस, जंबो साइज जैसे माप बंद हैं। इसके बावजूद इन माप में समान बेचे जा रहे हैं। मिठाई दुकानों व बेकरी में केक अभी भी पौंड में ही बिक रहे हैं।

36 प्रकरणों में वसूले गए 1 लाख 70 हजार रूपये

नाप तौल विभाग के इन्पेक्टर योगिता साम्भ्रकर ने CGaaj.com को जानकरी देते हुए बताया की 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक कुल 31 प्रकरणों में 1 लाख 40 हजार रूपये की वसूली की गई हैं, वही 1 अप्रैल 2019 से 29 मई 2019 तक 5 प्रकरणों में 30 हजार रूपये की वसूली की गई हैं, श्रीमती साम्भ्रकर ने आगे जानकारी देते हुए बताया की जिले में इलेक्ट्रानिक के लिए 2 और मैनुअल के लिए 2 लाईसेंसी हैं, वही साल में 4 क्वार्टर में कैम्प का आयोजन किया जाता हैं।

ऐसे बचें उपभोक्ता-
-पैकेट बंद सभी वस्तुओं को खरीदते समय ही दुकान पर तौल करवा लें
-दूध का पैकेट खरीदने से पहले देख लें कहीं दूध टपक तो नहीं रहा
-सीमेंट की बोरी भी तौल कर खरीदें, इसमें पांच सौ ग्राम तक का अंतर आ सकता है
-मिठाई को कभी पैकेट में नहीं तौलवाएं
-फल सब्जी खरीदने से पहले तौल कांटे पर पिन व रबर बैंड की पड़ताल कर लें
-पेट्रोल भी पंप की मशीन पर फिक्स कर लें
-ज्वेलरी खरीदने के बाद हॉलमार्क वाली बिल जरूर लें

“लाईसेंसी और हमारे द्वारा कैम्प लगाकर सत्यापन का कार्य किया जाता हैं, और जो उन कैम्प में छुट जाते हैं वे हमारे कार्यालय में आकर सत्यापन करवाते हैं, सत्यापन करने काम लाईसेंसी का हैं, अंत में जो सत्यापन बनाते हैं वह मेरे द्वारा जारी होता हैं,
योगिता साम्भ्रकर, इन्स्पेक्टर, नाप तौल विभाग