Home राज्य छत्तीसगढ़ अब छत्तीसगढ़ में हाथियों के आतंक पर होगा करेगा शोध

अब छत्तीसगढ़ में हाथियों के आतंक पर होगा करेगा शोध

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव द्वंद को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून शोध करने जा रहा है। यह रिसर्च तीन साल तक चलेगी। यह दल शोध आधारित क्षमता विकास का कार्य भी करेगा। मानव हाथी द्वंद्व को लेकर अंतरराज्यीय पहल के लिए राज्य सरकार एमओयू करने जा रही है। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि तिमोर पिंगला अभयारण्य में हाथियों के पेयजल के लिए 16 एनीकट, 11 स्टॉप डैम और 475 हेक्टेयर में चारागाह विकास कार्य कराया गया है। छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद्व में आदिवासियों की जान जा रही है। इसे रोकने के लिए सरकार ने रिसर्च कराने का फैसला किया है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों को जंगली हाथियों की सूचना देने के लिए आकाशवाणी केंद्र का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल, प्रदेश के छह जिलों में जंगली हाथियों का आतंक है। इससे निपटने के लिए सरकार ने हाथी बचाव और पुनर्वास केंद्र सूरजपुर के रमकोला बीट में खोला है। इसमें समस्यामूलक हाथियों को पकड़कर सुधारने का काम किया जा रहा है। बावजूद इसके हाथियों से जनहानि भी हो रही है। जनहानि को देखते हुए सरकार ने मुआवजा राशि को चार लाख से बढ़ाकर छह लाख कर दिया है।

सेटेलाइट से निगरानी

हाथियों के आंतक को रोकने के लिए सरकार की ओर से चलित हाथी दस्ता बनाया गया है। जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पर सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है। कर्मचारियों की गश्त भी लगाई जा रही है। गांवों में नुक्कड़ नाटक, रैली और कार्यशाला के माध्यम से भी जागरूकता की जा रही है।