Home लाइफ स्टाइल धर्म अध्यात्म रथ यात्राः भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में है श्रीकृष्ण का यह रहस्य

रथ यात्राः भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में है श्रीकृष्ण का यह रहस्य

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रथ यात्रा

पुरी। भगवान जगन्नाथ योगेश्वर श्रीकृष्ण का स्वरूप है जो धरती पर विराजमान है। गन्नाथपुरी को धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है। पुरी सिर्फ एक तीर्थ ना होकर रहस्यों की कई परते अपने में समेटे हुए है। पौराणिक काल से चले आ रहे ये रहस्य अभी तक बरकरार है और अनसुलझे हैं। मंदिर में काष्ट की प्रतिमाएं स्थापित है और भगवान जगन्नाथ की मनोहारी प्रतिमा के अंदर एक अद्भुत अलौकिक रहस्य समाया हुआ है।

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति श्रीकृष्ण के मोक्ष को अपने में समेटे हुए है। जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक बेहद रहस्यमय कहानी प्रचलित है, जिसके अनुसार मंदिर में मौजूद भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्वयं ब्रह्मा विराजमान हैं।

भालका तीर्थ में हुआ था श्रीकृष्ण का मोक्ष

मान्यता है कि श्रीकृष्ण की मृत्यु उस वक्त हुई थी जब वह प्रभास क्षेत्र के भालका तीर्थ में एक पीपल के पेड़ के नीचे लेटे हुए थे, तभी जरा नाम के एक भील के द्वारा छोड़ा गया एक जहरीला तीर उनके पैर के तलवे में लगा और इसी को उन्होंने धरती पर अपना अंतिम समय मानकर उन्होंने देहत्याग कर दिया।

पांडवों को जब श्रीकृष्ण की देहत्याग का पता चला तो उन्होंने विधि-विधान के साथ उनके नश्वर शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। सारा शरीर राख मे तब्दील हो गया, लेकिन ब्रह्मा कृष्ण के नश्वर शरीर में विराजमान थे इस कारण उनका दिल जलता ही रहा, तब ईश्वर के आदेशानुसार जलते हुए दिल को जल में प्रवाहित कर दिया गया और उस पिंड ने एक लट्ठे का रूप ले लिया।

राजा इन्द्रद्युम्न ने पिंड को किया प्रतिमा में स्थापित

अवंतिकापुरी के राजा इन्द्रद्युम्न, जो भगवान जगन्नाथ के परम भक्त थे, उनको यह लट्ठा मिला और उन्होंने इस दिल रुपी पिंड को भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर स्थापित कर दिया। प्राचीन समय में स्थापित किया गया श्रीकृष्ण का दिल आज भी भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में स्थापित है। इस पिंड को आज तक किसी ने नहीं देखा है।

नवकलेवर के अवसर पर जब 12 या 19 साल में मूर्तियों को बदला जाता है तब पुजारी की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और हाथ पर कपड़ा ढक दिया जाता है। इसलिए वे ना तो उस लट्ठे को देख पाए हैं और ही छूकर महसूस कर पाए हैं। बस इतना अहसास होता है कि लट्ठा काफी नर्म होता है।