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छत्तीसगढ़ में हड़तालियों की कटेगा वेतन, फार्मूला तय, अब ऐसी कार्रवाई होगी

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छत्तीसगढ़ में हड़तालियों की कटेगा वेतन, फार्मूला तय, अब ऐसी कार्रवाई होगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर सख्ती करने का फार्मूला तय किया है। 25 जुलाई से 29 जुलाई तक डीए व एचआरए की मांग को लेकर पांच दिनों तक हड़ताल करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्‌टी मंजूर कर ली गई हैं। उन्हें इस अवधि का वेतन भी मिलेगा, लेकिन यदि कोई अधिकारी – कर्मचारी 25 से 29 जुलाई को भी हड़ताल में था और वर्तमान में चल रही हड़ताल में भी शामिल है, तो उसे इस सुविधा का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही 25 से 29 जुलाई व 22 अगस्त से अब तक अनुपस्थित अधिकारियों – कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। जीएडी ने यह आदेश जारी कर दिया है।

हड़ताली अधिकारियों – कर्मचारियों के यूनियन नेताओं ने सोमवार को कृषि मंत्री रवींद्र चौबे से मुलाकात की। उन्होंने चौबे से मांग पूरी करवाने सीएम भूपेश बघेल से मिलवाने का आग्रह किया। खबर है कि चौबे ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उचित समय पर वे सीएम से इस बारे में चर्चा करेंगे। अभी आप लोग वे मुख्य सचिव अमिताभ जैन से बातचीत कर लें। उन्होंने जैन से फोन पर बात भी की।

इसके बाद यूनियन लीडर पश्चिम विधायक और संसदीय सचिव विकास उपाध्याय से मिले। विकास के साथ सभी सीएस अमिताभ जैन से मिलने गए। सीएस ने भी उनसे कहा कि वे मुख्यमंत्री से इस बारे में बात करेंगे। शासन ने हड़ताली कर्मचारियों से बात करने व उनकी मांगों को लेकर रिपोर्ट देने तीन आईएएस अफसरों डॉ. कमलप्रीत सिंह, डीडी सिंह व संजय अग्रवाल की कमेटी बना रखी है। आज हड़ताली कर्मचारी इन अफसरों से नहीं मिले हैं। कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने दावा किया कि मंत्रालय में सीएस के साथ चर्चा सकारात्मक रही।

ऐसे हो सकती है कार्रवाई

  • यह कदाचरण की श्रेणी में आता है।
  • ऐसे कृत्य पर वे अनुशासनात्मक कार्रवाई के भागी होंगे।
  • बिना अनुमति या सामूहिक अवकाश की स्वीकृति के हड़ताल में जाने पर अनुपस्थिति के दिनों व हड़ताल के दिनों का वेतन नहीं मिलेगा।
  • इस अवधि को ब्रेक – इन – सर्विस माना जाएगा।
  • ऐसे मामले में अनुशासनहीनता करने वालों के विरूद्ध गुण -दोषों के आधार पर सक्षम अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे।
  • यदि ऐसे मामलों में कुछ रियायतें देनी हैं तो किन्ही विशेष परिस्थितियों के कारण औचित्यपूर्ण आधार विद्यामान हों, तो ऐसी रियायतें देने के प्रस्ताव विभागाध्यक्ष शासन को विचार के लिए भेजेंगे।