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सारकेगुडा मुठभेड़ न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश, रिपोर्ट लीक होने पर भड़का विपक्ष

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सारकेगुडा मुठभेड़

रायपुर। सारकेगुडा एनकाउंटर में गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सोमवार को भूपेश सरकार ने सदन में पेश की। रिपोर्ट मीडिया में लीक होने पर भाजपा ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। बहस के बीच सदन में जमकर हंगामा हुआ। सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

रमन सिंह ने कहा कि इस मामले में मैंने मुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना दी है। ये रिपोर्ट सरकार के पास एक महीने से पड़ी हुई है, इसे सदन में पेश किया जाना था। इससे विधानसभा की गरिमा खत्म होती है। रिपोर्ट पेश होने के पहले इसे देशभर के अखबारों में छपवाया गया।

बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के विरुद्ध यह हमारा तीसरा विशेषाधिकार हनन की सूचना है। मुख्यमंत्री लगातार सदन की अवमानना कर रहे हैं। सदन का नेता ही यदि सदन का नेता करने लगेगा तो इस सदन का क्या औचित्य रह जाता है। सदन की मर्यादा बनाये रखने के लिए इस पर चर्चा जरूरी है।

बीजेपी विधायक अजय चन्द्राकर ने कहा, आज की कार्यसूची में कहीं ये उल्लेख नहीं है कि सारकेगुडा की न्यायिक जांच की रिपोर्ट पेश की जाएगी। यदि ऐसा था तो नई कार्यसूची जारी की जा सकती थी। आसंदी की अनुमति से क्या ये रिपोर्ट रखी गई? गुप-चुप तरीके से इस रिपोर्ट को पेश कर दिया गया।

मीडिया में रिपोर्ट लीक करवाना..उचित नहीं हैः नेता प्रतिपक्ष

वहीं नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सदन के सदस्यों को जांच प्रतिवेदन की जानकारी नहीं है और इस रिपोर्ट को मीडिया में लीक कर दिया गया, ये उचित नहीं है. सदन में ही जब विश्वसनीयता नहीं है तो बाहर क्या होगी? आखिर रिपोर्ट लीक कैसे हो गई? नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी को लेकर मोहन मरकाम ने कहा कि पिछली सरकार में भी मीना खलको न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट लीक की थी। आसंदी ने कहा विशेषाधिकार हनन की सूचना सुबह दस बजे मिली है, ये विचाराधीन है।