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सूचना के अधिकार कानून का अधिकारी बना रहे मज़ाक, जानकारी देने के बहाने कराते घंटो इंतज़ार, आवेदक से अपराधी की तरह बर्ताव

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सूचना के अधिकार कानून

बीजापुर. इन दिनों अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम कानून का मज़ाक उड़ाते नज़र आ आ रहे हैं। ताज़ा मामला मुख्य वन संरक्षक कार्यालय जगदलपुर का है । जहां सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत वन मंडल बीजापुर से निर्माण कार्यो के संबंध मे जानकारी चाही गई थी। समय पूरा होने बाद भी वन मंडल द्वारा जानकारी उपलब्ध नही कराया गया।

जानकारी नही मिलने के कारण आवेदक द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी मुख्य वन संरक्षक कार्यालय जगदलपुर को आवेदन किया गया। जंहा से 18 जून को सुबह 11 बजे सुनवाई के लिए पत्र आया। सुबह 11 बजे कार्यालय पंहुच मुख्य वन संरक्षक अधिकारी के निज सहायक से मिला और कहा कि मैं सुनवाई के लिए आया हूँ। निज सहायक ने कहा साहब शासकीय कार्य से बाहर गए है, आपको अगली सुनवाई के लिए पत्र के माध्यम से जानकारी दे दी जाएगी। आवेदक वापस जगदलपुर से बीजापुर आ गया।

आप बाहर इंतज़ार कीजिये मैं साहब को फ़ोन करता हूँ

26 जून शाम मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से फ़ोन आया कि आपके द्वारा सूचना के अधिकार के तहत चाही गई जानकारी के संबंध मे 27 जून को सुबह 11 बजे जगदलपुर कार्यालय मैं सुनवाई है। आवेदक सुबह बीजापुर से जगदलपुर के लिए निकला और 11 बजे कार्यालय पंहुच अपने आने की जानकारी दी। निज सहायक द्वारा साहब नही होने की जानकारी दी गई और कहा आप बाहर इंतज़ार कीजिये मैं साहब को फ़ोन करता हूँ ।

11.30 को साहब आफिस पंहुचे और अपने चैम्बर में चले गए. इस दौरान आवेदक और दंतेवाड़ा से सुनवाई के लिए आये पत्रकार किसी अपराधी की तरह इंतज़ार करते रहे। इस दौरान साहब अपने चहेते और सप्लयारों से मिलते रहे और आवेदक एक दूसरे का मुंह ताकते रहे जैसे पत्रकार नही मुजरिम है। ऐसा लग रहा था किसी कोर्ट के बाहर मुजरिम की तरह अपनी बारी का इंतज़ार करते रहे। मुजरिम और आवेदक में सिर्फ एक फर्क था, मुजरिम के हांथो मैं हथकड़ी लगी होती है और आवेदक बिन हथकड़ी के मुजरिम लग रहे थे।