Home राज्य छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा के सदस्यों को मिला ऐसा अधिकार…जानिए पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा के सदस्यों को मिला ऐसा अधिकार…जानिए पूरा मामला

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ग्रामसभा

रायपुर। देश की प्रतिष्ठित संस्था सेंटर फॉर साईंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने छत्तीसगढ सरकार की जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) को लोकोन्मुखी बनाने में किए संशोधनों की सराहना की है। सीएसई ने कहा है कि खनन प्रभावित लोगों को डीएमएफ की निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने व उनके हितों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का संशोधन देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल है। राज्य सरकार ने डीएमएफ में संशोधन कर खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्राम सभा सदस्यों को डीएमएफ के गवर्निंग बॉडी में शामिल करने का प्रावधान किया गया है।

खनन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों की ग्राम सभा से 10 सदस्यों को डीएमएफ परिषद में शामिल किया जाएगा। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा के कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी से होने चाहिए। महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

संशोधन के पूर्व प्रभावित क्षेत्रों की ग्राम सभा से मात्र दो सरपंच परिषद का हिस्सा हुआ करते थे। सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने बताया कि खनन प्रभावित आम लोगों को सशक्त बनाने में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रभावित लोगों के जीवन और आजीविका में सुधार की संभावनाएं खुलेंगी। छत्तीसगढ़ चार हजार करोड़ रुपये से अधिक के कुल संग्रह के साथ डीएमएफ के मामले में शीर्ष राज्यों में शुमार है।

पांच साल का बन रहा विजन प्लान

डीएमएफ में संशोधन कर लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पांच साल का विजन प्लान तैयार किया गया है। प्राथमिकता क्षेत्र जैसे पेयजल, आजीविका, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा के लिए कम से कम 60 प्रतिशत व्यय करने का प्रावधान किया गया है। सीएसई के उप महानिदेशक भूषण ने कहा कि डीएमएफ के अनियोजित व्यय को रोकने के लिए यह बहुत जरूरी कदम हैं।

पहले छत्तीसगढ में शहर के पार्किंग स्थल, एयरपोर्ट रनवे, कन्वेंशन हॉल पर पैसा खर्च किया जा रहा था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पर ध्यान दिया और इस तरह के निर्माण को रोक दिया। डीएमएफ की बेहतर सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) पर भी जोर दिया गया है।