Home राज्य छत्तीसगढ़ क्वांटिफायबल डाटा आयोग का सर्वे, छत्‍तीसगढ़ में ओबीसी की आबादी 41 प्रतिशत

क्वांटिफायबल डाटा आयोग का सर्वे, छत्‍तीसगढ़ में ओबीसी की आबादी 41 प्रतिशत

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क्वांटिफायबल डाटा आयोग का सर्वे, छत्‍तीसगढ़ में ओबीसी की आबादी 41 प्रतिशत

रायपुर। आरक्षण मामले में क्वांटिफायबल डाटा आयोग ने सर्वेक्षण पूरा हो गया है। यह सरकार के पास भी पहुंच गई है। दरअसल, यह आयोग सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश छबिलाल पटेल की अध्यक्षता में गठित की गई थी। क्वांटिफायबल डाटा आयोग ने सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। आयोग ने सर्वेक्षण में पाया है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी की आबादी 41 फीसदी है। वहीं सामान्य वर्ग के गरीबों की कुल संख्या आबादी के 3 फीसदी तक पाई गई है। जनगणना में ओबीसी का अलग से वर्गीकरण नहीं होने से यह संख्या अभी तक अनुमानों पर आधारित थी। माना जाता था कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 52 फीसदी से 54 फीसदी तक है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की गणना के लिए आयोग का गठन किया था। सर्वे का कार्य समय पर पूर्ण नहीं होने के कारण आयोग का कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया गया था। बताया जाता है कि अब इस रिपोर्ट को एक दिसंबर को होने जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

आयोग की ओर से चिप्स के माध्यम से निर्मित मोबाइल एप और वेब पोर्टल के माध्यम से सर्वे का कार्य एक सितंबर 2021 में प्रारंभ किया गया था। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में ओबीसी वर्ग का आरक्षण 27 प्रतिशत करने का वादा किया था। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद ओबीसी वर्ग के आरक्षण को 27 प्रतिशत करने की घोषणा की गई, जिसके विरोध में सामाजिक संगठनों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में अपील की थी।

ऐसे जुटाए आंकड़े

सूत्रों ने बताया कि अगस्त तक हुए सर्वेक्षण में प्रदेश में ओबीसी की आबादी का 41 प्रतिशत आंकड़ा ही जुटा पाए थे। वहीं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के आंकड़े भी 10 प्रतिशत से कम थे। लोगों को जागरूक करते हुए आंकड़े जुटाने की कवायद की गई है। आयोग में पदस्थ आला अधिकारियों की मानें तो इस बार ओबीसी का आंकड़ा प्रदेश की कुल आबादी का 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। सामाजिक संगठनों की मानें तो प्रदेश में ओबीसी की आबादी सामान्य रूप से 52 प्रतिशत मानी जाती है। अगस्त तक पूरी आबादी में एक करोड़ 20 लाख लाख के आसपास ही का डेटा जुटाया जा सका था। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग की आबादी चार से पांच प्रतिशत के माना जाता है।