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पुलिस के नाक के नीचे चल रहा बीसी एवं ब्याज का गोरखधंधा,सूदखोर हो रहे मालामाल तो वही किसान और जनता आत्महत्या करने मजबूर

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आत्महत्या करने मजबूर

बालोद– जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में बीसी और ब्याज का अनाप-शनाप धंधा जोरो शोरो से फल फूल रहा हैं, जिसकी गिरफ्त में ग्रामीण अंचलों के आज कई किसान वर्ग व युवा पीढ़ी आ चुकी हैं, जिसके चलते न जाने कितने घर तबाह भी हो गए हैं, और इतना ही नहीं जिले में किसानो द्वारा की गई आत्महत्या पर नज़र डाली जाए तो कई किसान साहूकारों द्वारा लिए गए अनाप-शनाप ब्याज के बोझ के तले दबकर ही आत्महत्या किए हैं, नगर सहित ग्रामीण अंचलों में साहूकारी प्रथा जमकर फल फुल रही हैं, किराना, ज्वेलरी, कपड़ा दुकानों में बैठे व्यापारी साहूकारी भी कर रहे हैं,

जिले में सहकारी प्रथा जोर-शोर से हावी

एक ओर जहां प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना, व्यापार लोन योजना, किसानो को शुन्य प्रतिशत दर से लोन एवं सहकारीता के तहत भी लोगों के लिए कई योजनाएं संचालित हैं, बावजूद जिले की जनता आज भी साहूकारों के चुंगल में जकड़े हुए हैं, अनाप शनाप ब्याज में लोगों को पैसे देकर उनसे जमीनों के दस्तावेज, बैंक के पासबुक, एटीएम, ब्लैंक चेक व विड्राल में हस्ताक्षर, कोरे स्टाम्प में हस्ताक्षर कर अपने पास रख लेते हैं.

जिसके चलते उधार लिए लोग उन साहूकारों से बंध जाते हैं, जिसका फायदा साहूकार उठाता आ रहा हैं, हफ्ते और महीने के हिसाब से 30-40 प्रतिशत के दर से पैसे वसूलते हैं, जिसकी वजह से कर्ज लिए लोग अनाप-शनाप ब्याज पटाकर कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं, ऐसे कई मामले बालोद जिले में आ चुके हैं, जिसमे कई साहूकारों की पुलिस में शिकायत भी हुई हैं और कुछ साहूकारों को तो जेल की हवा भी खानी पड़ी हैं,

जिले में चल रहा अवैध तरीके से बीसी का खेल

मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में समूह बनाकर कई साहूकारों द्वारा बीसी का अवैध खेल खिलवाया जा रहा हैं, जिसमे भी कई लोगों की जमा पूंजी साहूकारों ने अपने पास जमा करवा डकार लिए हैं, प्राप्त जानकारी अनुसार बहुत पहले महिलाओं द्वारा समूह बनाकर हफ्ते या मासिक रूप से बनाए गए समूह में राशि जमा की जाती थी, जिसके बाद जिसे पैसे की आवश्यकता होती थी, उस हिसाब से जरूरतमंद महिला पैसे ले लेती थी, फिर हफ्ते या महीने में किश्त के रूप में उसे जमा करती थी, पर आजकल पुरुषो ने भी ऐसे समूह बनाकर इसे धंधा बना लिया हैं.

अधिकतर बीसी खिलाने वाले किराना, कपडा, सोना-चांदी के व्यापारी हैं, जो व्यापारियों का समूह बनाकर बीसी का गोरखधंधा संचालित कर रहे हैं, ये लोग रोजाना, हफ्ते एवं महीने के हिसाब से लोगो से पैसे लेते हैं, तथा उसी पैसे को ब्याज में आगे चला देते हैं, जिससे बीसी खिलवा रहे लोगो को चौगुना मुनाफा होता हैं, सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जिला मुख्यालय एवं ब्लाक मुख्यालयों में कई ऐसे सेठ-साहूकार बन इस गोरखधंधा के खेल को अंजाम दे रहे हैं, जो लोगों की जमा पूंजी इस खेल में जमा करवा उन्हें बर्बाद कर रहे हैं, जिसके चलते कई लोगो के घर तबाह भी हो गए हैं।