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इन 6 ट्रांसजेंडर्स ने तोड़ी सामाजिक रूढियां, आज हर क्षेत्र में कर रही भारत का नाम रौशन

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नई दिल्ली। भारत में ट्रांसजेंडर्स शिक्षित होने के बावजूद समाज द्वारा बनाए गए नियमों के कारण हाशिए में ही गिने जाते हैं। हालांकि कई ट्रांसजेंडर्स ने इन नियमों के बेड़ियों को तोड़ते हुए समाज में अमूल्य योगदान दिया है और समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कोई प्रोफेसर है तो कोई पादरी, किसी ने राजनीति में कदम रखा है तो कोई मॉडलिंग में अपना परचम लहरा रही है। हम आपको आज ऐसे ही कुछ ट्रांसजेंडर्स से परिचित करा रहे हैं जिन पर भारत को गर्व है।


1. सहोदरी फाउंडेशन की संस्थापक कल्कि सुब्रमण्यम एक बेहतरीन उद्यमी हैं। भारत में ट्रांसजेंडर्स के सशक्तिकरण के लिए उन्होंने अथक प्रयास किया है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्री रखने वाली कल्कि एक बेहतरीन कवियत्री और लेखिका भी हैं। उन्हांने ट्रांसजेंडर्स के जीवन पर आधारित फिल्म ‘नर्तकी’ के साथ अपने अभिनय की शुरूआत भी की है।

रूद्राणी चेट्री

2. दिल्ली में रहने वाली रूद्राणी चेट्री सामाजिक कार्य करने वाले मित्रा ट्रस्ट की प्रमुख हैं। साथ ही वह ट्रांसजेंडर्स को मॉडलिंग के क्षेत्र में काम दिलाने के लिए अपनी प्रोफेशनल मॉडलिंग एजेंसी भी चलाती हैं। चेट्री ने ट्रांसजेंडर्स के लिए मॉडलिंग एंजेसी खोलने का निर्णय तब लिया, जब युवावस्था में खूबसूरत और टैलेंटेड होने के बावजूद मॉडलिंग एजेंसियां केवल ट्रांसजेंडर होने के कारण उन्हें रिजेक्ट कर देती थीं। इस विचार ने उन्हें प्रेरित किया और आज वह कई ट्रांसजेंडर मॉडल को काम दिला चुकी हैं।

पद्मिनी प्रकाश

3. एक बेहतरीन कथक नर्तक, वाइस ओवर आर्टिस्ट, मिस ट्रांसजेंडर ऑफ इंडिया की विनर होने के साथ-साथ पद्मिनी प्रकाश देश की पहली ट्रांसजेंडर समाचावाचक भी हैं। उन्होंने अपनी शुरूआत टेलीविजन के धारावाहिकों में अभिनय से की और धीरे-धीरे वह टीवी का एक लोकप्रिय चेहरा बन गयी। आपको बता दें कि वह देश के प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर हस्तियों में से एक हैं।

मनबी बंदोपध्याय

4. मनबी बंदोपध्याय, शारदा देवी की बहुत बड़ी भक्त हैं। वह भारत के सबसे प्रसिद्ध ट्रांजजेंडर्स में से एक हैं। मनबी के नाम एक और उपलब्धि जुड़ी हैं, वो ऐसी पहली ट्रांसजेंडर हैं जिन्होंने डॉक्टोरेट की उपाधि हासिल की है। वह विवेकानंद सतोबर्शिकी महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर थी और बाद में वह कृष्णानगर वीमेंस कॉलेज की प्राचार्य बनी। उनके छात्र उनसे बेहद प्यार करते हैं और सम्मान भी देते हैं।

महापौर मधु किन्नर

5. रायगढ़ नगर निगम की महापौर मधु किन्नर एक प्रसिद्ध लोकनर्तक और रंगमंच कलाकार हैं। ट्रांसजेंडर होने के कारण उन्हें बेहद कम उम्र में ही घर से निकाल दिया गया था। ट्रेन में गाने गाकर और नृत्य कर उन्होंने अपनी आजीविका अर्जित की। वह केवल आठवीं तक पढ़ी हैं लेकिन कम शिक्षित होने के बावजूद सामाजिक उत्थान के प्रति काम करने की लगन उन्हें रोक नहीं पायी। वह दलित, ट्रांसजेंडर और नगर पालिका के अंतर्गत लोगों के लिए भी बेहतरीन काम कर रही हैं।

एस्थर भारती

6. ईसाई में बपतिस्मा देने के बाद एस्थर भारती को कम उम्र में ही घर से निकाल दिया था। आज वह भारत की पहली ट्रांसजेंडर पादरी हैं। गांव में उनके साथ किसी अछूत की तरह व्यवहार किया जाता था। एस्थर ने कई कष्टों का सामना किया। भारती ने धर्मशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और उसके बाद चेंगलपट्टू इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया में पादरी के रूप में काम करती हैं। कभी उनसे अछूतों की तरह व्यवहार किया जाता था और आज उन्हें शादी समारोह और नए बच्चे के जन्म पर आशीर्वाद देने के लिए बुलाया जाता है।