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आज मजदूर दिवस पर पहली बार बोरे-बासी खाओ अभियान, सोशल मीडिया में ट्रेंड

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार मजदूर दिवस अलग तरह यानी बोरे-बासी खाओ अभियान की तर्ज पर मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के लोगों से बोरे-बासी खाकर मजदूर दिवस मनाने की अपील की, इसके बाद सोशल मीडिया पर संदेशों की लाइन लगी हुई है और यह ट्रेंड भी कर रहा है। दरअसल, ताजा भात को जब पानी में डुबाकर खाया जाता है तो उसे बोरे कहते हैं। इसे दूसरे दिन खाने पर यह बासी कहलाता है। छत्तीसगढ़ में इसे तीसरे दिन भी खाने की परंपरा है। इसे तियासी कहते हैं।

छत्तीसगढ़ी परंपरा को जानने वाले बताते हैं कि आम या नींबू का अचार, प्याज और हरी मिर्च, दही या मही डालकर, खट्टी भाजी, कांदा भाजी, चेंच भाजी, बोहार भाजी, रखिया बड़ी, मसूर दाल की सब्जी या मसूर बड़ी, रात की बची हुई अरहर दाल के संग, कढ़ी, आम की चटनी, लाखड़ी भाजी, सलगा बरा की कढ़ी, जिर्रा फूल चटनी, बिजौरी के साथ खाया जाता है।

इसके लाभ

  • बासी खाने से होंठ नहीं फटते
  • इसमें पानी भरपूर होता है जिससे गरमी में ठंडक मिलती है
  • पानी मूत्र विसर्जन क्रिया को बढ़ाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
  • पाचन तंत्र को सुधारता है।
  • पथरी और मूत्र संस्थान की दूसरी बीमारियों से बचाता है।
  • चेहरे के साथ पूरी त्वचा में चमक पैदा करता है। पानी और मांड के कारण ऐसा होता है।
  • कब्ज, गैस और बवासीर से दूर रखता है।
  • मोटापे से बचाता है।
  • मांसपेशियों को ताकत देता है।

अगर कोई पूछे कितना बजा है। सामने वाला कहे कि बासी खाए के बेरा हो गे तो इसका मतलब है एक-दो बज रहा है। अगर कोई पूछ कितने बजे काम पर जाओगे-सामने वाला कहे- बासी खा के निकलहूं, इसका मतलब है आठ बजे के करीब निकलेगा। बासी के डिब्बे से मजदूरों की गिनती
खेत मजदूर आम तौर पर बासी का डिब्बा किसी पेड़ के नीचे कतार से रख देते हैं। खेत का मालिक डिब्बों को देखकर अनुमान लगा लेता है कि कितने मजदूर आए हैं।