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बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए दिव्यांग पिता बेचना चाहता है अपनी किडनी

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किडनी

सूरत। बच्चों की खुशी और उनका भविष्य सुरक्षित बनाने के लिए माता-पिता क्या नहीं करते लेकिन कईं बार यह त्याग दुनिया के लिए मिसाल बन जाता है। हालांकि, माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति जो त्याग होता है उसकी कोई कीमत नहीं होती लेकिन फिर भी कुछ लोग एक कदम आगे निकल जाते हैं।

ऐसे ही एक शख्स हैं सूरत के रहने वाले जयेश पटेल। जयेश अपने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपनी किडनी तक बेचने के लिए तैयार हैं। सूरत के वंसदा तालुका में स्थित आदिवासी इलाके में बसे उपसल गांव के रहने वाले जयेश पटेल दोनों आंखों से देख नहीं पाते।

दरअसल, जयेश ने 1995 में अपना ग्रेजुएशन पूरा कर लिया था। इसके बाद वो अपने लिए नौकरी ढूंढने लगे लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था और एक हादसे में उनकी दोनों आंखें चली गईं। इसके बाद जयेश दूसरों पर निर्भर हो गए। इन परिस्थितियों के बावजूद जयेश ने अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया और अब वो डॉक्टर बनना चाहता है।

10वीं में 90.59 प्रतिशत अंक प्राप्त किए

बेटे साहिल ने 10वीं में 90.59 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। साहिल साइंस पढ़ना चाहता है और उसे अब तक उसके शिक्षकों ने खूब मदद की है। लेकिन बेटे की डॉक्टर बनने की चाह को जानकर जयेश अब उसके लिए अपनी किडनी बेचने को भी तैयार हैं।

जयेश का कहना है मुझे पता था कि मेरा बेटा पढ़ने में तेज है। वो डॉक्टर बनना चाहता है लेकिन मैं उसे पढ़ाने में सक्षम नहीं हूं। मेरे पास उसके सपने पूरे करने के लिए अपनी किडनी बेचने के अलावा कोईं रास्ता नहीं है क्योंकि आंखें गंवाने के बाद से मेरी पत्नी घर चला रहा है।

इस मामले में जयेश को अब तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है।